श्रीगोपालजी धाम, दयालबाग में शुक्रवार को श्रीब्रह्मापुराण कथा का समापन हुआ
जनपद आगरा:-श्रीगोपालजी धाम, दयालबाग में शुक्रवार को श्रीब्रह्मापुराण कथा का समापन हुआ। गुरुदीपिका योगक्षेम फाउंडेशन के तत्वावधान में चल रही इस कथा में 7 दिन तक भगवान श्री जगन्नाथ जी की कथाएं सुनाई गई तथा भगवान आदि शंकराचार्य गंगा माता भगवान परशुराम जी आदि के अवतरण दिवस भी मनाए गए।
अंतिम दिन की कथा सुनाते हुए कथावाचक डॉ दीपिका उपाध्याय ने बताया कि भगवान की लीला को वही समझ सकता है जो हृदय की गहराइयों से भगवान का भक्त हो। भगवान जगन्नाथ भगवान कृष्ण का ही कल्याणकारी रूप है। भगवान ने अवतरित होते ही धरती पर से आसुरी भार कम करना प्रारंभ किया। गोधन की रक्षा कर भगवान ने जीवों के संरक्षण का संदेश दिया। इसी प्रकार भगवान कृष्ण की काली दह की लीला जल की स्वच्छता का संदेश देती है। कालिय नाग के द्वारा विषाक्त की गई यमुना को शुद्ध करके भगवान ने जल स्रोतों की स्वच्छता का संदेश दिया है।
इसी प्रकार भगवान कृष्ण द्वारा प्रारंभ कराई गई गोवर्धन पूजा भी भू संपदा के संरक्षण का संदेश देती है। भगवान कृष्ण का जीवन दर्शन मानव मात्र के प्रति प्रेम का अद्भुत उदाहरण है। पूरी लीला में भगवान ने मानव हित को सर्वोपरि रखा है। धरती के अहंकारी राजाओं का वध करने के बाद वे यदुकुल का भी संहार करते हैं क्योंकि महाभारत युद्ध की विजय ने यदुवंशियों का अहंकार बहुत बढ़ा दिया था।
नरकासुर द्वारा हरण की गई स्त्रियों को भगवान श्री कृष्ण मात्र इसलिए पत्नी रूप में रूप में स्वीकारते हैं जिससे कोई उन स्त्रियों के सम्मान पर उंगली ना उठाएं। द्वारकाधीश की पत्नी होने के बाद वे समाज के द्वारा सम्मानित होंगी जब कि अपहृत होने के बाद कोई भी न तो उन्हें स्वीकारता और ना ही सम्मान की दृष्टि से देखता। भगवान कृष्ण द्वारा युद्ध भूमि में दिया गया गीता का संदेश अप्रतिम बौद्धिक धरोहर है।
कथावाचक ने बताया कि आज माता बगलामुखी जयंती है। माता के इस रूप की आराधना करने से मनुष्य बुद्धि, शक्ति और संपदा सहज ही प्राप्त हो जाती है। भक्तों ने इस अवसर पर माता को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर गुरुदीपिका योगक्षेम फाउंडेशन के निदेशक रवि शर्मा ने बताया कि कल शनिवार शाम 5:00 बजे से श्रीहरि का दिव्य सहस्रार्चन प्रारंभ होगा। सभी हरि भक्त नियत समय पर अपना स्थान ग्रहण करें।