आगरा में नौसिखिए तथाकथित पत्रकारों का आतंक चरम सीमा पर
पत्रकारिता का नहीं है कोई ज्ञान,24 घण्टे दलाली पर रहता है ध्यान
थाना ,चौकी के इर्द-गिर्द घूमते हैं दलाल,अपना काम छोड़कर दलाली से होना चाहते हैं मालामाल
पीड़ितों को न्याय न मिलने पर पहले लिया जाता था पत्रकारों का सहारा,अब पीड़ित खुद करें रहे हैं तथाकथित पत्रकारों से किनारा
कुछ बन गए हैं नए पत्रकार,बदलने चले हैं बिना ज्ञान के संसार
हल्दी लगे ना फिटकरी रंग चोखा,बना लो यूट्यूब चैनल और मार लो पत्रकारिता में मौका
संपादक-मुनीष अल्वी की कलम से वर्तमान सच्चाई
जनपद आगरा:-किसी भी इमारत या ढांचे को खड़ा करने के लिए चार स्तंभों की आवश्यकता होती है उसी प्रकार लोकतंत्र रूपी इमारत में विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका को लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तम्भ माना जाता है जिनमें चौथे स्तम्भ के रूप में मीडिया को शामिल किया गया है| किसी देश में स्वतंत्र व निष्पक्ष मीडिया उतनी ही आवश्यक व महत्वपूर्ण है जितना लोकतंत्र के अन्य स्तम्भ इस प्रकार पत्रकार समाज का चौथा स्तम्भ होता है जिसपर मीडिया का पूरा का पूरा ढांचा खड़ा होता है जो नीव का कार्य करता है यदि उसी को भ्रष्टाचार व असत्य रूपी घुन लग जाए तो मीडिया रूपी स्तम्भ को गिरने से बचाने व लोकतंत्र रूपी इमारत को गिरने से बचाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
एक समय ऐसा भी था कि जब एक पत्रकार की कलम से लिखा गया एक एक शब्द देश की राजधानी में बैठे बड़े बड़े नेताओं ,अधिकारियों की कुर्सियों को हिला देता था लेकिन आज समय बहुत ही विपरीत है ।आज के समय में कुछ तथाकथित पत्रकारों ने मीडिया को ग्लैमर की दुनिया और पूरी तरह कमाई का साधन बना रखा है ।अपनी धौंस जमाने और गाड़ी पर प्रेस लिखाने के अलावा इन्हें पत्रकारिता का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है ।
ऐसा ही कुछ मामला जनपद आगरा में हैं इस जिले में पत्रकारों की बाढ़ सी आई हुई हैं यहाँ हर एक तीसरा व्यक्ति अपने आपको पत्रकार बताता है ।सोशल मीडिया के बढ़ते दौर में पत्रकारिता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं ।एक यूट्यूब चैनल बनाकर प्ले स्टोर से आवाज डबिंग की एप्पलीकेशन डाऊनलोड कर खबरों को मोबाइल से उल्टी सीधी बनाकर वायरल करना और खुलेआम बताना कि हम पत्रकार हैं हमारा ये चैनल हैं ।हम बहुत बड़े है बाकी सब छोटे हैं ।जबकि यह सब बोलने बालों को पत्रकारिता का ककहरा नहीं पता होता है ।
पत्रकारिता का नहीं है कोई ज्ञान,24 घण्टे दलाली पर रहता है ध्यान
जनपद आगरा में नौसिखिए पत्रकारों का आतंक चरम सीमा पर है ।इन्हें पत्रकारिता का बिल्कुल ज्ञान नहीं है 24 घण्टे दलाली पर ध्यान रहता है।सोचते हैं कि हम पत्रकार बन गए है सारा शासन प्रशासन हमारी मुठ्ठी में है हम जो चाहे वो कर सकते है ।एक समय ऐसा होता था कि जब पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता था तो पत्रकारों का सहारा लिया जाता था लेकिन आज का समय ऐसा है कि पीड़ित को पता लग जाए कि यह पत्रकार है तो स्वंय पीडित उस पत्रकार से किनारा कर जाते है ।इसका कारण पत्रकारिता में दलालों एंव नौसिखिए तथाकथित पत्रकारों की एंट्री होना ।अगर गलती से पीड़ित पत्रकार के पास चला भी जाए तो बाद में अपने आपको ठगा सा महसूस करता है ।क्योंकि तथाकथित पत्रकार उस पीड़ित को बुरी तरह लूट लेते है ।
थाना चौकी के इर्द -गिर्द घूमते है दलाल
जिले के यमुनापार क्षेत्र के एक थाना क्षेत्र में नौसिखिए तथाकथित पत्रकारों का आतंक चरम सीमा पर है ।इस क्षेत्र में आने बाली एक चौकी पर हमेशा नौसिखिए तथाकथित पत्रकार बने रहते है इनके कारण पुलिस भी सही तरह से काम नहीं कर पाती है ।कई बार कुछ वीडियो भी वायरल हुए है ।लेकिन फिर भी इन तथाकथित पत्रकारों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है ।सच बात यह भी है कि इन तथाकथित नौसिखिए पत्रकारों को हिंदी लिखने का भी बिल्कुल ज्ञान नहीं है ,कॉपी पेस्ट करके इन कथित पत्रकारों की दुकान धड़ल्ले से चल रही हैं।इनके कारण अच्छे पत्रकारों की भी छवि धूमिल हो रही है ।
जनपद गाजीपुर जैसा हो आदेश ,फिर आ सकता है सुधार
यूपी के ग़ाजीपुर में लगातार अवैध वसूली और पत्रकारिता कि छवि गिराने वाले पत्रकारों को लेकर जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने कुछ समय पहले सख्त आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि किसी भी संस्थान में पहुंचा कोई व्यक्ति खुद को पत्रकार बताता है तो उसका परिचय गहनता से चेक करें, संदेह होने पर या परिचय उपलब्ध न कराए जाने पर उसके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही कराना सुनिश्चित करें।
जनपद गाजीपुर जिलाधिकारी द्वारा जारी किए गए आदेश की तरह आगरा में भी एक ऐसा ही आदेश जारी किया जाए औऱ तथाकथित पत्रकारों पर बड़ी कार्यवाही की जाए ।आदेश जारी हो जाए तो पत्रकारिता कुछ स्तर तक सुधार आ सकता है और नौसिखिए तथाकथित पत्रकार बिना ज्ञान चला रहे अपनी दुकान बंद कर सकते हैं ।पुलिस प्रशासन को भी कार्य करने में आसानी होगी और क्षेत्र में संदेश भी अच्छा जाएगा ।
अभी गुप्त में कुछ जानकारी दी जा रही है जरूरत पड़ी तो कथित पत्रकारों के नाम के साथ समाचार राइट पर खबर प्रेषित की जाएगी ।