अपनी ही कार चोरी दिखाने वाला भाजपा नेता जेल पहुंचा, कोर्ट में सरेंडर के बाद भेजा गया न्यायिक हिरासत में - समाचार RIGHT

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शुक्रवार, 12 जून 2026

अपनी ही कार चोरी दिखाने वाला भाजपा नेता जेल पहुंचा, कोर्ट में सरेंडर के बाद भेजा गया न्यायिक हिरासत में

अपनी ही कार चोरी दिखाने वाला भाजपा नेता जेल पहुंचा, कोर्ट में सरेंडर के बाद भेजा गया न्यायिक हिरासत में

आगरा। आगरा में अपनी ही कार चोरी का झूठा मुकदमा दर्ज कराने के मामले में भाजपा नेता देवकीनंदन शर्मा को आखिरकार अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ा। लंबे समय से कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश कर रहे आरोपी नेता ने गुरुवार को न्यायालय में सरेंडर कर दिया, जिसके बाद अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

कार चोरी की कहानी निकली फर्जी

मामला वर्ष 2024 का है, जब देवकीनंदन शर्मा ने थाना जगनेर में अपनी बोलेरो गाड़ी संख्या UP-80 ET-1679 के चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने काफी तलाश के बाद भी वाहन बरामद नहीं होने पर मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी, लेकिन कागारौल पुलिस ने जांच जारी रखी।

जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पुलिस को भी चौंका दिया। पता चला कि कार चोरी की कहानी पूरी तरह से फर्जी थी और इसके पीछे कोई और नहीं बल्कि शिकायतकर्ता स्वयं देवकीनंदन शर्मा ही मास्टरमाइंड था।

पहले बेची गाड़ी, फिर रची चोरी की साजिश

पुलिस जांच में सामने आया कि देवकीनंदन शर्मा ने उक्त बोलेरो पहले ही जगनेर निवासी दीपक कुमार मंगल को बेच दी थी, लेकिन वाहन का स्वामित्व हस्तांतरण नहीं कराया गया था। बाद में आर्थिक तंगी और अन्य कारणों के चलते उसने अपने सगे भाई मनमोहन शर्मा उर्फ छोटू के साथ मिलकर उसी गाड़ी को दोबारा हासिल करने की साजिश रच डाली।

आरोप है कि देवकीनंदन ने भगवान टॉकीज क्षेत्र से गाड़ी की नकली चाबी बनवाई और दीपक के घर के बाहर खड़ी बोलेरो को चोरी करवा लिया। इसके बाद दोनों भाइयों ने वाहन को जयपुर निवासी एक खरीदार को बेच दिया।

टोल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल से खुला राज

पुलिस ने मामले की गहन जांच करते हुए टोल टैक्स के रिकॉर्ड, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला। जांच में मिले पुख्ता सबूतों के आधार पर करीब 400 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें दोनों भाइयों की कथित भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया गया।

समन और वारंट के बाद किया सरेंडर

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत ने आरोपियों को कई बार समन और नोटिस जारी किए, लेकिन वे पेश नहीं हुए। इसके बाद दोनों ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। बाद में न्यायालय ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिए।

बताया गया है कि बीते मंगलवार को भी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दशम) की अदालत में देवकीनंदन शर्मा की ओर से अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी, लेकिन अदालत ने उसे भी अस्वीकार कर दिया। कानूनी दबाव बढ़ने पर गुरुवार को आरोपी भाजपा नेता ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।

न्यायिक हिरासत में भेजा गया

सरेंडर के बाद अदालत ने देवकीनंदन शर्मा को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए। वहीं पुलिस और अभियोजन पक्ष का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्य मजबूत हैं और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक कथित कार चोरी की शिकायत की जांच करते-करते पुलिस ने शिकायतकर्ता को ही आरोपी के रूप में चिन्हित कर दिया। अब पूरे प्रकरण को आगरा के चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है।

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