खारी नदी में जलकुम्भी बनी 18 भैंसों की काल, गहरे गड्ढों में फंसकर डूबे मूक पशु; किसानों के घर मचा कोहराम
आगरा। किरावली थाना क्षेत्र के चैंकोरा गांव में शनिवार को खारी नदी में हुआ दर्दनाक हादसा दो किसानों के परिवारों पर भारी पड़ गया। पानी पिलाने के लिए नदी में उतारी गईं 18 भैंसें घनी जलकुम्भी के जाल में फंसकर डूब गईं। देखते ही देखते किसानों का लाखों रुपये का पशुधन नदी की गहराइयों में समा गया। हादसे की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया और दोनों किसानों के परिवारों में कोहराम मच गया।
जानकारी के अनुसार चैंकोरा गांव निवासी कमल सिंह बघेल की 12 भैंसें और वीरेंद्र बघेल की छह भैंसें शनिवार को पानी पिलाने के लिए खारी नदी पर ले जाई गई थीं। भैंसें जैसे ही नदी में उतरीं, वे वहां फैली घनी जलकुम्भी में फंस गईं। जलकुम्भी का जाल इतना घना था कि भैंसें उससे निकलने के लिए लगातार छटपटाती रहीं, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
बताया जा रहा है कि नदी में बड़े पैमाने पर हुए खनन के कारण कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। आशंका है कि पानी में उतरने के बाद भैंसें इन्हीं गड्ढों में जा फंसीं। गहराई में जाने के बाद उनके लिए संभलना मुश्किल हो गया और ऊपर से घनी जलकुम्भी ने उन्हें बुरी तरह जकड़ लिया।
ग्रामीणों ने बचाने के लिए किया भरसक प्रयास
हादसे की जानकारी मिलते ही दोनों किसानों के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी किनारे पहुंच गए। भैंसों को बचाने के लिए लोगों ने हरसंभव प्रयास किया। ग्रामीणों ने जलकुम्भी हटाकर पशुओं को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन नदी की गहराई और जलकुम्भी की अधिकता के कारण राहत कार्य सफल नहीं हो सका।
ग्रामीणों के मुताबिक भैंसें काफी देर तक पानी के भीतर निकलने के लिए संघर्ष करती रहीं। उनकी छटपटाहट देखकर मौके पर मौजूद लोगों ने भी उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन देखते ही देखते एक के बाद एक सभी 18 मूक पशु पानी में समा गए।
घटना की जानकारी मिलने पर अछनेरा के एसीपी भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से घटना की जानकारी ली।
खनन के गहरे गड्ढों पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद नदी में हुए खनन को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी में बड़े पैमाने पर खनन के कारण तल में कई जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों के कारण नदी का स्वरूप खतरनाक हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी में जलकुम्भी का जाल नहीं होता और गहरे गड्ढे नहीं बने होते तो शायद भैंसों को बचाया जा सकता था। ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी में हुए खनन की जांच कराने की मांग की है।
शाम तक एक भैंस का शव निकाला जा सका
शाम तक ग्रामीणों के प्रयास से एक भैंस का शव नदी से बाहर निकाला जा सका, जबकि बाकी पशुओं के शवों को निकालने के प्रयास जारी थे। नदी में घनी जलकुम्भी और गहराई के कारण ग्रामीणों के लिए राहत कार्य करना बेहद मुश्किल बना हुआ था।
ग्रामीणों ने कहा कि नदी में पड़े पशुओं के शवों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जाना जरूरी है। शवों के सड़ने से नदी का पानी दूषित होने और आसपास के क्षेत्र में संक्रमण फैलने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
आंखों के सामने डूब गया पशुधन, रो पड़े किसान
अपना पशुधन आंखों के सामने गंवाने के बाद किसान कमल सिंह बघेल और वीरेंद्र बघेल बदहवास हो गए। दोनों किसानों और उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। ग्रामीणों ने उन्हें संभालने का प्रयास किया और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
किसानों के लिए ये भैंसें महज पशुधन नहीं थीं, बल्कि परिवार की आजीविका का बड़ा सहारा थीं। एक साथ 18 भैंसों की मौत से दोनों परिवारों को आर्थिक रूप से भी बड़ा झटका लगा है।
नेताओं ने मौके पर पहुंचकर प्रशासन से मांगी आर्थिक मदद
हादसे की जानकारी मिलने के बाद रालोद नेता बृजेश चाहर, फतेहपुर सीकरी ब्लॉक प्रमुख के पति गुड्डू चाहर, अरविंद चाहर समेत अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित किसानों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।
नेताओं ने प्रशासन से दोनों किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से पशुधन के नुकसान का उचित मुआवजा दिलाने की मांग उठाई है।
जलकुम्भी की सफाई और खनन की जांच की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी दिखाई दी। ग्रामीणों ने मांग की कि खारी नदी में फैली जलकुम्भी को तत्काल हटाया जाए और नदी में हुए अवैध अथवा अनियंत्रित खनन की जांच कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते नदी से जलकुम्भी नहीं हटाई गई और गहरे गड्ढों को लेकर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी इस तरह के हादसे हो सकते हैं। 18 मूक पशुओं की दर्दनाक मौत ने गांव के लोगों को झकझोर कर रख दिया है और अब ग्रामीण प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।