दलहन-तिलहन का रकबा बढ़ाएं, आत्मनिर्भर कृषि की ओर कदम बढ़ाएं किसान: सूर्य प्रताप शाही - समाचार RIGHT

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गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

दलहन-तिलहन का रकबा बढ़ाएं, आत्मनिर्भर कृषि की ओर कदम बढ़ाएं किसान: सूर्य प्रताप शाही

दलहन-तिलहन का रकबा बढ़ाएं, आत्मनिर्भर कृषि की ओर कदम बढ़ाएं किसान: सूर्य प्रताप शाही

रबी उत्पादकता गोष्ठी में कृषि मंत्री ने दिया फसल विविधीकरण, संतुलित उर्वरक, उन्नत बीज और प्राकृतिक खेती पर जोर, बोले—किसान अन्नदाता के साथ बनें बीजदाता और कृषि उद्यमी

आगरा। रबी सीजन की तैयारियों के बीच आगरा में आयोजित राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी में किसानों को खेती को नई दिशा देने का संदेश दिया गया। कृषि मंत्री उत्तर प्रदेश सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में मंडलायुक्त सभागार में आगरा, अलीगढ़ और बरेली मंडल की संयुक्त राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 आयोजित हुई। कृषि मंत्री ने किसानों से दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने, फसल विविधीकरण अपनाने, संतुलित उर्वरक प्रयोग करने, गुणवत्तापूर्ण बीज का इस्तेमाल करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इससे पहले उन्होंने प्रमुख सचिव कृषि एमके शन्मुगा सुन्दरम के साथ कमिश्नरी परिसर में लगाए गए कृषि मेले की विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया और कृषि क्षेत्र में संचालित गतिविधियों की जानकारी ली। कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि यंत्रों की चाबियां और प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए गए।

आत्मनिर्भर कृषि से विकसित भारत का रास्ता

कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में कृषि क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कृषि को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाए बिना विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों की आय के नए अवसर भी विकसित करने होंगे।

उन्होंने कहा कि मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठियों का उद्देश्य केवल अधिकारियों की बैठक करना नहीं, बल्कि किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझना और उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों तक कृषि योजनाओं की जानकारी समय से पहुंचे और उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।

मैनपुरी और मथुरा के कृषि प्रयासों की सराहना

आगरा मंडल में गेहूं और चना उत्पादन की चर्चा करते हुए कृषि मंत्री ने मैनपुरी में इन फसलों की बेहतर उत्पादकता की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य के औसत से अधिक उत्पादकता उत्साहजनक है और इसके लिए किसानों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों के प्रयास सराहनीय हैं।

उन्होंने मथुरा में कृषि उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों की भी प्रशंसा की। मंत्री ने किसानों से कहा कि खेती की योजना बनाते समय स्थानीय मिट्टी, जलवायु, बाजार की मांग और फसल की लाभप्रदता को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सरसों समेत दलहन-तिलहन पर बढ़े जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि खाद्य तेल और दलहन की मांग पूरी करने के लिए देश को बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और विभिन्न दलहनी फसलों के उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय दलहन मिशन और राष्ट्रीय तिलहन मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना है। उत्तर प्रदेश में सरसों का उत्पादन बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने उत्पादन को लगभग 10 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 35 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने की जानकारी दी और इसे आगे 40 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने का लक्ष्य बताया।

उन्होंने किसानों से परंपरागत फसलों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय बाजार की मांग और लाभ की संभावनाओं के अनुरूप फसल विविधीकरण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आलू महत्वपूर्ण फसल है, लेकिन बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसानों को सरसों और अन्य वैकल्पिक फसलों की संभावनाओं पर भी विचार करना चाहिए।

समर्थन मूल्य और उत्पादन लागत का रखें ध्यान

कृषि मंत्री ने गेहूं, जौ, चना और मसूर के न्यूनतम समर्थन मूल्य का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को बुवाई से पहले फसल के समर्थन मूल्य और उत्पादन लागत का आकलन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसान की उपज को उचित मूल्य मिलना भी जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों से किसानों को समर्थन मूल्य, सरकारी खरीद और कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

संतुलित उर्वरक से बचेगी मिट्टी की सेहत

मंत्री ने संतुलित उर्वरक प्रयोग पर विशेष जोर देते हुए कहा कि डीएपी, एनपीके और यूरिया का इस्तेमाल मिट्टी और फसल की आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए। उन्होंने जैविक खाद, गोबर की खाद और कंपोस्ट के उपयोग को भी बढ़ावा देने की बात कही।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सलाह के आधार पर उर्वरकों का इस्तेमाल करने से उत्पादन लागत नियंत्रित रखने के साथ भूमि की उर्वरता को भी बनाए रखने में मदद मिलेगी।

खेती के साथ पशुपालन और डेयरी को भी बढ़ाएं

कृषि मंत्री ने कहा कि खेती और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं। विशेषकर ब्रज क्षेत्र में गौपालन की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने किसानों से पशुपालन, गोबर की खाद और कृषि आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि खेती के साथ दूध उत्पादन, दुग्ध प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमों को अपनाकर किसान आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल उत्पादक नहीं, बल्कि कृषि उद्यमी बनने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।

किसान अन्नदाता के साथ बनें बीजदाता

श्री शाही ने गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता को कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रदेश में लगभग 12 लाख क्विंटल बीज वितरण की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों को बीजदाता बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

उन्होंने लखनऊ में चौधरी चरण सिंह के नाम पर प्रस्तावित सीड पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे बीज उत्पादन की क्षमता बढ़ाने और किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के माध्यम से किसानों को किफायती दरों पर बीज उपलब्ध कराया जा रहा है।

तीन वर्षों में फसल सघनता 220 प्रतिशत करने का लक्ष्य

कृषि मंत्री ने फसल सघनता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि भूमि का अधिक प्रभावी उपयोग कर किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाई जा सकती है। अगले तीन वर्षों में फसल सघनता को 220 प्रतिशत तक पहुंचाने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने खाली पड़ी कृषि भूमि के उचित उपयोग और मिश्रित खेती को बढ़ावा देने की बात कही।

अनुसंधान और नई तकनीक से बदलेगी खेती की तस्वीर

कृषि मंत्री ने कृषि अनुसंधान को भविष्य की खेती के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए नई किस्मों, जलवायु अनुकूल तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

उन्होंने वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय परिसर तथा आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशियाई परिसर के विकास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आगरा और आसपास के क्षेत्रों में आलू महत्वपूर्ण फसल है, इसलिए यहां अनुसंधान सुविधाओं का विस्तार किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

उन्होंने कृषि अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि बदलती जलवायु, बढ़ती उत्पादन लागत और बाजार की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए ही प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

किसानों की समस्याओं के समाधान पर भी हुआ संवाद

गोष्ठी के दौरान किसानों ने कृषि उत्पादकता, उर्वरक के संतुलित उपयोग, फसल विविधीकरण और कृषि योजनाओं से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव और अनुभव साझा किए। कृषि मंत्री ने किसानों के सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए संबंधित अधिकारियों से समस्याओं के समाधान की दिशा में गंभीरता से काम करने को कहा।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव कृषि एमके शन्मुगा सुन्दरम, निदेशक कृषि त्र्यंबक मणि त्रिपाठी, प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम आशुतोष कुमार मिश्रा, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, जिलाधिकारी मनीष बंसल, अपर आयुक्त प्रशासन राजेश कुमार, अलीगढ़ के अपर आयुक्त प्रदीप कुमार यादव, मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, डीडी कृषि मुकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार, जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी समेत आगरा, अलीगढ़ और बरेली मंडल के कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारी, किसान और मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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