आलू-शकरकंद की खेती में नई तकनीकों पर जोर, कृषि मंत्री ने सीसार्क फार्म का किया भ्रमण - समाचार RIGHT

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गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

आलू-शकरकंद की खेती में नई तकनीकों पर जोर, कृषि मंत्री ने सीसार्क फार्म का किया भ्रमण

आलू-शकरकंद की खेती में नई तकनीकों पर जोर, कृषि मंत्री ने सीसार्क फार्म का किया भ्रमण

किसानों की आय बढ़ाने से लेकर गुणवत्तापूर्ण बीज और कम लागत वाली खेती तक पर हुआ मंथन, PZTM और ARC तकनीक में दिखी विशेष रुचि

आगरा। किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू और शकरकंद की संपूर्ण मूल्य शृंखला में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही तथा कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शनमुगा सुंदरम ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र सीसार्क के स्टॉल का अवलोकन किया। इसके बाद दोनों अधिकारियों ने सिंगना स्थित सीसार्क फार्म का भ्रमण कर अनुसंधान गतिविधियों और विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे की जानकारी ली।

यह भ्रमण आगरा में आयोजित संयुक्त मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 के दौरान हुआ। अधिकारियों ने सीसार्क की ओर से आलू और शकरकंद की उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण बीज प्रणाली को मजबूत करने तथा जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने के प्रयासों को देखा।

खेती से बाजार तक पूरी मूल्य शृंखला पर फोकस

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने वैज्ञानिकों के साथ चर्चा करते हुए कहा कि आलू और शकरकंद में अनुसंधान का दायरा केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बीज उत्पादन से लेकर खेती, प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन तक पूरी मूल्य शृंखला में ऐसी तकनीकों का विकास जरूरी है, जिनका सीधा लाभ किसानों को मिले।

उन्होंने ऐसी तकनीकों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया, जिनसे किसानों की उत्पादन लागत कम हो, फसल की गुणवत्ता बेहतर हो और उनकी आय में वृद्धि हो सके। फार्म पर शकरकंद की विभिन्न किस्मों का अवलोकन करते हुए उन्होंने इसके क्षेत्र में अनुसंधान और तकनीकी विकास की संभावनाओं में भी रुचि दिखाई।

आलू के साथ शकरकंद पर भी उन्नत अनुसंधान की जरूरत

प्रमुख सचिव डॉ. एम.के. शनमुगा सुंदरम ने आलू के साथ शकरकंद में भी उन्नत अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने सीसार्क के माध्यम से दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत करने और विभिन्न देशों में विकसित उन्नत किस्मों की भारतीय कृषि परिस्थितियों में उपयोगिता का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने की आवश्यकता बताई।

कम लागत वाली तकनीकों ने खींचा ध्यान

आगरा के आयुक्त सभागार में आयोजित रबी उत्पादकता गोष्ठी में सीसार्क के स्टॉल पर प्रसंस्करण और टेबल उपयोग के लिए आलू की विभिन्न किस्मों के साथ गुणवत्तापूर्ण G0 बीज उत्पादन की एपिकल रूटेड कटिंग्स (ARC) तकनीक तथा पुआल मल्च के साथ शून्य जुताई आधारित आलू उत्पादन प्रणाली (PZTM) का प्रदर्शन किया गया।

कृषि मंत्री और प्रमुख सचिव ने विशेष रूप से कम लागत वाली PZTM तकनीक और ARC पद्धति में रुचि दिखाई। गोष्ठी में आगरा, अलीगढ़ और बरेली क्षेत्र से पहुंचे किसानों ने भी इन तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखाई।

अनुसंधान और प्रदर्शन गतिविधियों के लिए तैयार हो रहा सीसार्क फार्म

सिंगना स्थित सीसार्क फार्म पर कृषि मंत्री और प्रमुख सचिव का स्वागत सीसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने किया। उन्होंने फार्म की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्यों की प्रगति और आगामी रबी मौसम में प्रस्तावित अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी दी।

मंत्री और प्रमुख सचिव ने उम्मीद जताई कि सीसार्क आने वाले समय में आलू एवं शकरकंद के अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों के प्रसार के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय केंद्र के रूप में विकसित होगा।

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