कौआ शहर की सबसे ऊंची इमारत पर ही क्यो ना जाकर बैठ जाए;तब भी वह रहता हैं कौआ ही वो बाज नही बन जाता;अर्थात;"इंसान अपने गुणों से महान बनता है,ऊंचे पद,व अमीर घराणे मे जन्म लेने से नही-इंजीनियर लख्मीचंद यादव।"
"परिपक्वता"इसमे नही है,की हम कितना "जानते"हैं,या हम कितना "शिक्षित"है बल्कि इसमें हैं कि हम ,किसी भी "जटिल" से "जटिल" स्थिति में भी "शांति"से "निपटने" में कितने "सक्षम" है,
पंछी जब अपने पंखों पर विश्वाश करता है तो वह सारा आसमान उसी का हो जाता है।आप लोग भी अपनी मेहनत पर विश्वास कीजिए।एक दिन हर तरफ आपका ही नाम होगा।
।। कोई आपकी सरहाना करे या निंदा दोनों अच्छा ही है
क्योकि प्रशंसा प्रेरणा देती है निंदा सावधान होने का अवसर ।।
जिस स्थान या जिस घर में आपके जाने से लोग खुश ना हो और उन लोगो की आँखों मे आपके प्रति प्रेम व स्नेह ना हो हम समझते हैं वहाँ हमे कभी भी नही जाना चाहिए चाहे वहाँ धन की ही वर्षा क्यो ना होती हो।
हमें अपनी आखिरी सांस तक लड़ना है, दोस्तों..संघर्ष कितना भी बड़ा क्यों न हो...आत्मविश्वास से लड़े गए संघर्ष के बाद जीत निश्चित है और जीत एक गर्व की बात है।...
हमारा अनुभव कहता है एक अच्छा व सच्चा मित्र हजार मतलबी अहसां फरमोस गद्दारी करने वाले मित्रो से बेहतर होता है
जो चीज आपको चेलेंज करती हैं वही चीज आपको चेंज भी करती है ये ध्यान रहे।
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संघर्ष और जनसेवा हैं हमारा लक्ष्य।
इंजीनियर लख्मीचंद यादव राष्ट्रिय अध्यक्ष भारतीय जनसेवा मिशन सम्पर्क-9927530581।