आगरा:-मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा0 विजयवीर चन्द्रयाल ने अवगत कराया है कि गोवंशीय पशुओं में फैलने वाली लम्पी स्किन डिसीज (गॉठदार चमडी रोग) विषाणु जनित चर्म रोग है, जोकि कैपरीपोक्स विषाणु के कारण होता हैं। यह बीमारी गरम व नम मौसम में मक्खी, मच्छर व बीमार गोवंश के सम्पर्क द्वारा फैलती है। यह बीमारी जानवरों से इंसानों में नहीं फैलती हैं।
उन्होंने बताया है कि इस बीमारी के लक्षण यथा- पशु को तेज बुखार, आंख व नाक से पानी गिरना, पैरों में सूजन। कठोर एवं चपटी गॉठ से शरीर का ढक जाना। पशुओं में चमडी पर घाव, श्वसन तंत्र पर अल्सर हो जाते हैं। सांस लेने में कठिनाई, वजन घटना, शरीर कमजोर होना तथा गर्भपात व दूध कम होना पाया जाता है।
उन्होंने बताया है कि बीमारी होने पर निकटतम पशु चिकित्साधिकारी को तत्काल सूचित करें। संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग करें। संक्रमित पशु को आवागमन प्रतिबंधित करें। मच्छरों, मक्खियों, किलनियों आदि से बचाने के लिये कीटनाशक का उपयोग करें। पशुबाडा, गौशाला में फिनायल/सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिडकाव करें। बीमारी से बचाव हेतु पशुओ में एल०एस०डी० से बचाव हेतु टीका लगवायें। पशुओं को सार्वजनिक चारागाह में चरने के लिये न भेजें। पशु मेला/पशु पैठ एवं प्रदर्शनी में पशुओं को न भेजें। पशु के शव को खुले में न फेकें वैज्ञानिक विधि से दफनाएं। बीमार एवं स्वस्थ पशुओं को एक साथ चारा-पानी न कराएं। रोग प्रभावित पशु का दूध बछडे़-बछियों को न पिलाऐं। पशु बाड़े को सूखा व साफ रखें तथा संक्रमित पशु के दूध को उबालकर प्रयोग करें।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया है कि जनपद पर लम्पी स्किन बीमारी की रोकथाम हेतु 24 घण्टें की व्यवस्था हेतु कंट्रोल रूम सदर पशु चिकित्सालय सदर भट्ठी आगरा पर स्थापित किया गया है, जिसके प्रभारी डा0 सुरेश चन्द्र वर्मा, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सदर आगरा है। कंट्रोल रूम का नं० 8765957899 है। उन्होंने बताया है कि कंट्रोल रूम पर निम्न पालियों में कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जिसमें श्रीमती शिल्पी पशुधन प्रसार अधिकारी की ड्यूटी प्रातः 06 बजे से दोपहर 02 बजे तक, सुरेश कुमार वर्मा पशुधन प्रसार अधिकारी की ड्यूटी दोपहर 02 :00 बजे से रात्रि 10ः00 बजे तक तथा बलवीर सिंह पशुधन प्रसार अधिकारी की ड्यूटी रात्रि 10ः00 बजे से प्रातः 06ः00 बजे तक लगायी गयी है।
उन्होंने बताया है कि इस बीमारी के लक्षण यथा- पशु को तेज बुखार, आंख व नाक से पानी गिरना, पैरों में सूजन। कठोर एवं चपटी गॉठ से शरीर का ढक जाना। पशुओं में चमडी पर घाव, श्वसन तंत्र पर अल्सर हो जाते हैं। सांस लेने में कठिनाई, वजन घटना, शरीर कमजोर होना तथा गर्भपात व दूध कम होना पाया जाता है।
उन्होंने बताया है कि बीमारी होने पर निकटतम पशु चिकित्साधिकारी को तत्काल सूचित करें। संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग करें। संक्रमित पशु को आवागमन प्रतिबंधित करें। मच्छरों, मक्खियों, किलनियों आदि से बचाने के लिये कीटनाशक का उपयोग करें। पशुबाडा, गौशाला में फिनायल/सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिडकाव करें। बीमारी से बचाव हेतु पशुओ में एल०एस०डी० से बचाव हेतु टीका लगवायें। पशुओं को सार्वजनिक चारागाह में चरने के लिये न भेजें। पशु मेला/पशु पैठ एवं प्रदर्शनी में पशुओं को न भेजें। पशु के शव को खुले में न फेकें वैज्ञानिक विधि से दफनाएं। बीमार एवं स्वस्थ पशुओं को एक साथ चारा-पानी न कराएं। रोग प्रभावित पशु का दूध बछडे़-बछियों को न पिलाऐं। पशु बाड़े को सूखा व साफ रखें तथा संक्रमित पशु के दूध को उबालकर प्रयोग करें।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया है कि जनपद पर लम्पी स्किन बीमारी की रोकथाम हेतु 24 घण्टें की व्यवस्था हेतु कंट्रोल रूम सदर पशु चिकित्सालय सदर भट्ठी आगरा पर स्थापित किया गया है, जिसके प्रभारी डा0 सुरेश चन्द्र वर्मा, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सदर आगरा है। कंट्रोल रूम का नं० 8765957899 है। उन्होंने बताया है कि कंट्रोल रूम पर निम्न पालियों में कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जिसमें श्रीमती शिल्पी पशुधन प्रसार अधिकारी की ड्यूटी प्रातः 06 बजे से दोपहर 02 बजे तक, सुरेश कुमार वर्मा पशुधन प्रसार अधिकारी की ड्यूटी दोपहर 02 :00 बजे से रात्रि 10ः00 बजे तक तथा बलवीर सिंह पशुधन प्रसार अधिकारी की ड्यूटी रात्रि 10ः00 बजे से प्रातः 06ः00 बजे तक लगायी गयी है।