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बुधवार, 1 अप्रैल 2026

जनकवि नज़ीर अकबराबादी की विरासत को संजोने हेतु हस्ताक्षर अभियान शुरू

जनकवि नज़ीर अकबराबादी की विरासत को संजोने हेतु हस्ताक्षर अभियान शुरू

आगरा:- जनकवि मियां नज़ीर अकबराबादी की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से अमृता विद्या – एजुकेशन फॉर इम्मोर्टालिटी सोसायटी द्वारा एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की गई है। संस्था के सचिव अनिल शर्मा ने बताया कि यह पहल न केवल एक नई शुरुआत है, बल्कि पूर्व में किए गए प्रयासों को आगे बढ़ाने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

नज़ीर अकबराबादी, जो अपनी धर्मनिरपेक्ष और लोकजीवन से जुड़ी कविताओं के लिए प्रसिद्ध रहे हैं, गंगा-जमुनी तहज़ीब के सशक्त प्रतीक माने जाते हैं। संस्था का मानना है कि वर्तमान पीढ़ी को उनके साहित्यिक योगदान से परिचित कराना समय की आवश्यकता है, ताकि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित रह सके।

इस अभियान के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार का ध्यान नज़ीर अकबराबादी की उपेक्षित विरासत की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। संस्था की मांग है कि उनकी स्मृति में स्मारकों और पुस्तकालयों का निर्माण या जीर्णोद्धार किया जाए, उनकी रचनाओं को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में उचित स्थान दिया जाए तथा ताजगंज स्थित मल्लिकों गली में उनकी मज़ार और संबंधित स्थलों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

नज़ीर अकबराबादी का आगरा और ताजमहल के प्रति गहरा लगाव रहा है। उन्होंने अपना पूरा जीवन इसी शहर की संस्कृति, गलियों और जनजीवन को समर्पित कर दिया। उनकी रचनाओं में भारतीय समाज, त्योहारों, मेलों और आम आदमी के जीवन का जीवंत चित्रण मिलता है, जो उन्हें सच्चे अर्थों में ‘जनकवि’ बनाता है।

संस्था ने सरकार से यह भी मांग की है कि आगरा मेट्रो के किसी प्रमुख स्टेशन का नाम ‘नज़ीर अकबराबादी मेट्रो स्टेशन’ रखा जाए और मेट्रो स्टेशनों की दीवारों पर उनकी प्रसिद्ध रचनाओं को प्रदर्शित किया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक आगरा की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान और गंगा-जमुनी संस्कृति से परिचित हो सकें। इसके अलावा, पुरानी मंडी से मल्लिको गली तक के मार्ग का नाम ‘नज़ीर अकबराबादी मार्ग’ रखने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

इस अभियान की शुरुआत मल्लिको गली स्थित उनकी मज़ार से की गई, जिसमें स्थानीय नागरिकों, साहित्य प्रेमियों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। साथ ही, नज़ीर अकबराबादी के जीवन पर एक डॉक्यूमेंट्री-ड्रामा फिल्म बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है, जिसके लिए एक प्रोमो फिल्म तैयार कर उस पर चर्चा की गई।

यह अभियान न केवल एक महान कवि की स्मृतियों को संजोने का प्रयास है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक एकता और साझा विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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