आगरा में व्यापारियों को बड़ी राहत: ट्रेड लाइसेंस व्यवस्था निरस्त करने के निर्देश
आगरा के व्यापारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा ने नगर क्षेत्र में लागू ट्रेड लाइसेंस व्यवस्था को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में उन्होंने नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल को पत्र लिखकर 69 ट्रेड मदों पर लगाए गए लाइसेंस शुल्क को रद्द करने को कहा है।
गौरतलब है कि 1 सितंबर 2025 को नगर निगम सदन के 12वें अधिवेशन में विभिन्न व्यापारिक गतिविधियों पर ट्रेड लाइसेंस शुल्क लागू करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन इसके बाद से ही शहर के व्यापारियों में असंतोष बना हुआ था और लगातार इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग उठ रही थी।
महापौर ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया कि वर्तमान ट्रेड लाइसेंस प्रणाली में व्यापक अनियमितताएं, प्रशासनिक जटिलताएं और संभावित भ्रष्टाचार की स्थिति सामने आई है, जिससे व्यापारियों और आम नागरिकों को आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जनहित और व्यापारी हित को देखते हुए इस व्यवस्था को समाप्त करना जरूरी है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह व्यवस्था अधिनियम की धारा 298 और 541 की मूल भावना—पारदर्शिता, सुगमता और जनहित—के अनुरूप प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर पा रही है। इसलिए इन धाराओं के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए तत्काल प्रभाव से इस व्यवस्था को समाप्त करने की अपेक्षा की गई है।
महापौर ने नगरायुक्त को यह भी निर्देशित किया है कि एक नई, सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त वैकल्पिक प्रणाली तैयार कर जल्द लागू की जाए, जिससे व्यापारियों को अनावश्यक बाधाओं से राहत मिल सके और राजस्व व्यवस्था भी सुचारु बनी रहे।
नगर निगम द्वारा जिन 69 ट्रेड श्रेणियों पर लाइसेंस शुल्क लागू किया गया था, उनमें मॉल व ब्रांडेड शोरूम, फाइनेंस कंपनियां, टेंट हाउस, पेठा कारखाने, थोक जनरल स्टोर, मार्बल-टाइल्स विक्रेता, फाउंड्री एवं इंजीनियरिंग इकाइयां, पेंट की दुकानें, डेयरी फार्म, ब्यूटी पार्लर, ज्वेलर्स, मोटर वाहन एजेंसी, जूता उद्योग, हार्डवेयर और निर्माण सामग्री से जुड़े कारोबार शामिल थे। अब इन सभी को इस फैसले से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
बताया जा रहा है कि व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में महापौर से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखी थीं, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। अब देखना होगा कि नई व्यवस्था कितनी जल्दी लागू होती है और यह व्यापारियों के लिए कितनी राहतकारी साबित होती है।