आगरा में बंदरों पर नियंत्रण की तैयारी: पकड़कर वन क्षेत्रों में छोड़े जाएंगे, जिला स्तरीय समिति गठित
आगरा। शहर में बढ़ते मानव-बंदर संघर्ष को देखते हुए शासन ने बड़ी पहल की है। अब आगरा में बंदरों को पकड़कर वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। इस संबंध में नगर निगम को शासन स्तर से आदेश जारी कर दिए गए हैं और इसके लिए जिला स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है।
प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग, आगरा के अनुसार बंदरों के नियंत्रण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत अब बंदरों (रिसस मकाक) को पकड़ने के लिए वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
योजना के अनुसार, बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई नगर निगम, नगर निकाय और ग्राम पंचायतों द्वारा कराई जाएगी। यह कार्य केवल प्रशिक्षित और अनुभवी व्यक्तियों से ही कराया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना या अव्यवस्था न हो।
पकड़े गए बंदरों को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित जनपद के वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। यदि जिले में उपयुक्त वन क्षेत्र उपलब्ध नहीं होता है, तो उन्हें अन्य उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि संरक्षित क्षेत्रों में बंदरों को नहीं छोड़ा जाएगा।
बंदरों को पकड़ने, उनके परिवहन और पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया में 16 अक्टूबर 2018 को जारी दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा। इस पूरे अभियान की निगरानी के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित की गई है, जिसमें पुलिस, वन विभाग, नगर निकाय, पशुपालन विभाग, पंचायत विभाग और एक नामित गैर-सरकारी संस्था के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इसके अलावा स्थानीय निकायों को कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बंदरों को भोजन आसानी से उपलब्ध न हो और उनकी संख्या व गतिविधियों पर नियंत्रण किया जा सके। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे, जिनके माध्यम से लोगों को आवश्यक जानकारी और सावधानियां बताई जाएंगी।