एआई हमारी सहायक है, पर्यवेक्षक नहीं - डॉ. गिरीश कुमार सिंह
आगरा:-जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान आगरा में प्राचार्य डायट अनिरुद्ध यादव के निर्देशन एवं इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी खंदारी कैंपस आगरा के सहयोग से आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के चतुर्थ दिवस प्रथम सत्र में असिस्टेंट प्रोफेसर इंजी. सौरभ गर्ग ने चैट जीपीटी का उपयोग करके सामग्री निर्माण चैट जीपीटी और जेमनि का परिचय, एआई-आधारित सामग्री निर्माण तकनीकें, एआई का उपयोग करके पाठ योजना और नोट्स तैयार करना, प्रश्न पत्र और बहुविकल्पीय प्रश्न निर्माण कक्षा के लिए सामग्री लेखन शिक्षण, एआई-सहायता प्राप्त प्रस्तुति और स्क्रिप्ट लेखन, हिंदी और अंग्रेजी में सामग्री निर्माण, बेहतर एआई प्रतिक्रियाओं के लिए प्रॉम्प्ट लेखन, एआई उपकरणों का नैतिक और जिम्मेदारी से उपयोग के बारे में बताया साथ ही उन्होंने व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से पोस्टर निर्माण, पीपीटी, प्रश्नपत्र निर्माण पर प्रशिक्षुओं को हैंड्स ऑन प्रैक्टिस के माध्यम से सत्र संचालित किया। द्वितीय सत्र में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ ग्रीश कुमार सिंह ने एआई का उपयोग करके वर्ड की मूल बातें एम एस वर्ड और ए आई सुविधाओं का परिचय, स्मार्ट दस्तावेज़ निर्माण और फ़ॉर्मेटिंग, एआई की सहायता से टाइपिंग और कंटेंट लेखन, टेबल, हेडर, फ़ूटर और पेज डिज़ाइन, व्याकरण और वर्तनी जाँच के लिए एआई उपकरण, रिज्यूमे, पत्र और रिपोर्ट तैयार करना, स्मार्ट टेम्प्लेट और दस्तावेज़ स्टाइलिंग,अनुवाद और बहुभाषी कंटेंट सहायता का उपयोग करके दस्तावेजों की समीक्षा और स्वतः सारांश,शैक्षिक दस्तावेज़ निर्माण पर व्यावहारिक अभ्यास का अवसर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि एआई हमारी सहायक है पर्यवेक्षक नहीं। इस अवसर पर बोलते हुए शैक्षिक तकनीकी प्रभारी डॉ मनोज कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि चैट जीपीटी एवं जैमिन आई एवं वर्ड में एआई का उपयोग करने से रिपोर्ट राइटिंग बहुत आसान हो गया है। परंतु इसे किसी को प्रेषित करने से पूर्व प्रमाणिकता व सत्यता को जांचना जरूरी है। वर्तमान समय के लिए ये महत्वपूर्ण एवं प्रासंगिक एप्लीकेशन हैं। एआई के माध्यम से इनका उपयोग बहुत ही सुलभ एवं प्रभावशाली हो जाता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ मनोज कुमार वार्ष्णेय ने किया। इस अवसर पर प्रवक्ता अनिल कुमार, यशवीर सिंह, कल्पना सिन्हा, हिमांशु सिंह, रंजना पांडे, यशपाल सिंह, अबु मुहम्मद आसिफ, धर्मेन्द्र प्रसाद गौतम, डॉ प्रज्ञा शर्मा, लक्ष्मी शर्मा आदि के साथ सभी प्रशिक्षुओं का सहयोग रहा।