ग्रीष्मकालीन फसलों की नियमित निगरानी करें किसान- उप कृषि निदेशक
आगरा:- उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) राजेश कुमार ने अवगत कराया है कि वर्तमान समय में आगरा मंडल के जनपदों में तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव होने के कारण मक्का, अरहर, मूंग एवं उड़द जैसी ग्रीष्मकालीन फसलों में विभिन्न प्रकार के कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों की नियमित निगरानी करते हुए समय रहते आवश्यक बचाव एवं प्रबंधन उपाय अपनाने चाहिए।
उन्होंने बताया कि मक्का की फसल में तना भेदक एवं ग्रीष्मकालीन कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है, जबकि अरहर में फली मक्खी एवं फली छेदक कीट किसानों के लिए समस्या बन सकते हैं। इसी प्रकार मूंग एवं उड़द की फसलों में स्कैबरोरा पत्ती धब्बा रोग तथा पीला चित्रवर्ण रोग का खतरा बना रहता है। किसानों को सलाह दी गई है कि खेतों का नियमित निरीक्षण करें तथा प्रारंभिक अवस्था में ही नियंत्रण उपाय अपनाएं, जिससे फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
राजेश कुमार ने बताया कि भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS) के माध्यम से आधुनिक तकनीक एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित व्यवस्था विकसित की गई है, जिसके द्वारा फसलों में कीट एवं रोगों की निगरानी की जा रही है। इस प्रणाली के माध्यम से किसानों को समय-समय पर आवश्यक सुझाव एवं परामर्श उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जनपद स्तर पर कृषि रक्षा विभाग के अधिकारियों एवं तकनीकी सहायकों द्वारा खेतों का भ्रमण कर किसानों को जागरूक किया जा रहा है तथा गोष्ठियों एवं किसान पाठशालाओं के माध्यम से भी जानकारी दी जा रही है।
उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) ने किसानों से अपील की है कि वे फसलों में किसी भी प्रकार के रोग या कीट का प्रकोप दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी कृषि रक्षा इकाई अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही दवाओं का प्रयोग करें।