फसलों में कीट-रोग प्रकोप की आशंका, कृषि रक्षा अधिकारी ने बताए बचाव के उपाय
ग्रीष्मकालीन फसलों की नियमित निगरानी करें किसान, समय पर करें कीट एवं रोग नियंत्रण-जिला कृषि अधिकारी
ग्रीष्मकालीन फसलों में बढ़ा तना भेदक, फॉल आर्मी वर्म और पीला चितकबरा रोग का खतरा, AI आधारित राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली से होगी फसलों की सुरक्षा
मक्का से लेकर मूंग-उड़द तक, कीट-रोग नियंत्रण के लिए कृषि विभाग की विस्तृत सलाह,समय रहते करें नियंत्रण, नहीं तो फसलों को हो सकता है भारी नुकसान
आगरा:-जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार ने बताया है कि वर्तमान में आगरा मंडल में तापमान में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण मक्का, अरहर तथा मूंग/उड़द जैसी ग्रीष्मकालीन फसलों में कीट एवं रोगों के प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। किसानों को अपनी फसलों का नियमित निरीक्षण कर समय रहते आवश्यक प्रबंधन एवं रासायनिक नियंत्रण उपाय अपनाने चाहिए।
मक्का फसल में तना भेदक कीट
फसल में 10 प्रतिशत मृत गोभ (डेड हार्ट) दिखाई देने पर नियंत्रण आवश्यक है। इसके लिए डाइमेथोएट 30 ईसी की 660 मिली मात्रा 700 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। वैकल्पिक रूप से लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 5.25 प्रतिशत + थियामेथोक्साम 12.6 प्रतिशत जेडसी की 1.5 लीटर मात्रा 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव किया जा सकता है।
फॉल आर्मी वर्म
इसके नियंत्रण हेतु 20-25 पक्षी आश्रय (बर्ड पर्चर) एवं 3-4 प्रकाश प्रपंच लगाने के साथ 35-40 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर स्थापित करें। रासायनिक नियंत्रण के लिए क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी की 75 मिली या ब्र्रोफ्लानिलाइड 20 प्रतिशत एससी की 125 मिली मात्रा 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
अरहर की फसल फली मक्खी
यदि 5 प्रतिशत फलियां प्रभावित दिखाई दें तो डाइमेथोएट 30 ईसी की 1 लीटर मात्रा या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 200 मिली मात्रा अथवा एसीटामिप्रिड 20 डब्ल्यूपी की 150 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर अनुशंसित है।
फली छेदक कीट
एक सूंडी अपने जीवनकाल में 30-40 फलियों को नुकसान पहुंचा सकती है। नियंत्रण हेतु खेत की मेड़ों पर गेंदा को ट्रैप क्रॉप के रूप में लगाएं तथा फूल एवं फलियां बनने के समय 5 गंधपाश (फेरोमोन ट्रैप) प्रति हेक्टेयर लगाएं।
जब प्रति 10 पौधों पर 2 छोटी अथवा 1 बड़ी सूंडी दिखाई दे तो एथियान 50 प्रतिशत ईसी की 1.2 लीटर मात्रा या फ्लूबेंडियामाइड 39.35 प्रतिशत एससी की 100 मिली मात्रा 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।
मूंग एवं उड़द फसल
स्कॉर्सपोरा पत्ती धब्बा रोग
रोग के लक्षण दिखाई देने पर मेटिराम 70 प्रतिशत डब्ल्यूजी की 1.25 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर या टेबुकोनाजोल 25.9 प्रतिशत ईसी की 750 मिली मात्रा 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इससे रोग का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।
पीला चितकबरा रोग नियंत्रण
प्रभावित पौधों को नष्ट कर देना चाहिए।
यह रोग सफेद मक्खी से फैलता है, इसलिए प्रति हेक्टेयर 6–8 स्टिकी ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है।
सफेद मक्खी के रासायनिक नियंत्रण हेतु:
डाइमेथोएट 30 ईसी की 1 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर,एजाडिरैक्टिन 0.15% ईसी की 2.5 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर,500–600 लीटर पानी में घोलकर 10–15 दिन के अंतराल पर 2–3 छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS)
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा AI तकनीक आधारित राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली स्थापित की गई है।
एनपीएसएस पोर्टल के माध्यम से GIS आधारित कीट एवं रोग संबंधी जानकारी एकत्र कर विशेषज्ञों द्वारा सुझाव एवं सिफारिशें प्रदान की जाएंगी।
एनपीएसएस एकीकृत कमांड सेंटर फसलों में कीट एवं रोगों के संक्रमण की भविष्यवाणी, नियंत्रण एवं प्रबंधन में सहायता करेगा।
जनपद स्तर पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी एवं तकनीकी सहायकों को स्मार्ट आईडी प्रदान की गई है, जिनके माध्यम से कीट एवं रोगों की निगरानी तथा किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे फसलों की नियमित निगरानी करें तथा किसी भी प्रकार के कीट या रोग का प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क कर अनुशंसित दवाओं का ही प्रयोग करें।