ई-रजिस्ट्री के विरोध में वकीलों का अर्धनग्न प्रदर्शन, नौवें दिन भी जारी रही हड़ताल
आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार की नई ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को आगरा में वकीलों की हड़ताल नौवें दिन भी जारी रही। विरोध दर्ज कराने के लिए सदर तहसील के अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टाम्प वेंडर्स ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया तथा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
दोपहर करीब तीन बजे बड़ी संख्या में अधिवक्ता सदर तहसील स्थित निबंधन कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ई-रजिस्ट्रेशन और फ्रंट ऑफिस व्यवस्था लागू होने से पारंपरिक पंजीकरण प्रक्रिया प्रभावित होगी तथा अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों के हितों को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंभूनाथ वर्मा और महासचिव अरविंद कुमार दुबे के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में दस्तावेज लेखक संघ के अध्यक्ष राम उपाध्याय, लाल बहादुर राजपूत, राजीव उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, स्टाम्प वेंडर्स और उनके सहायक मौजूद रहे।
लगातार नौ दिनों से चल रही हड़ताल का असर अब आम जनता पर भी पड़ने लगा है। बैनामे और संपत्ति पंजीकरण का कार्य लगभग ठप हो गया है, जिससे जमीन की खरीद-फरोख्त प्रभावित हो रही है। निबंधन कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ है और करोड़ों रुपये के संपत्ति सौदे अटके पड़े हैं।
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार इस नई व्यवस्था को नागरिकों के लिए सुविधाजनक और पारदर्शी बता रही है। सरकार का कहना है कि ई-रजिस्ट्री प्रणाली लागू होने से संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बनेगी। प्रारंभिक चरण में विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद की संपत्तियों की रजिस्ट्रियां ऑनलाइन माध्यम से कराई जाएंगी।
नई व्यवस्था के तहत संबंधित संस्थाओं को लॉगिन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे वे डिजिटल माध्यम से पूरी पंजीकरण प्रक्रिया संपन्न कर सकेंगी। आवंटियों को बार-बार निबंधन कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और संबंधित संस्था के कार्यालय में ही निर्धारित प्राधिकारी की निगरानी में प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
सरकार ने ई-रजिस्ट्री प्रणाली में बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल हस्ताक्षर और आधार आधारित ई-केवाईसी को अनिवार्य किया है। शासन का दावा है कि इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी और नागरिकों को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी।
फिलहाल आगरा समेत प्रदेश के कई जिलों में अधिवक्ताओं का विरोध जारी है। ऐसे में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर सरकार और वकीलों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है, जिसका असर संपत्ति पंजीकरण कार्यों पर साफ दिखाई दे रहा है।