आगरा में बारिश ने खोली विकास और नाला सफाई के दावों की पोल, 20 से अधिक इलाकों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित - समाचार RIGHT

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गुरुवार, 9 जुलाई 2026

आगरा में बारिश ने खोली विकास और नाला सफाई के दावों की पोल, 20 से अधिक इलाकों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित

आगरा में बारिश ने खोली विकास और नाला सफाई के दावों की पोल, 20 से अधिक इलाकों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित

आगरा। बुधवार सुबह करीब छह बजे से शुरू हुई बारिश ने शहर में एक बार फिर जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी कर दी। नगर निगम के मानसून पूर्व नाला सफाई अभियान और विकास कार्यों के दावों की पोल पहली ही तेज बारिश में खुलती नजर आई। शहर के कई इलाकों में सड़कें तालाब बन गईं, नाले उफान पर आ गए और कई घरों में पानी घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मंगलवार शाम से शुरू हुई बारिश का असर बुधवार तक बना रहा। लगातार हुई बारिश के कारण शहर के 20 से अधिक क्षेत्रों में जलभराव हो गया। कई स्थानों पर सड़कों पर दो-दो फीट तक पानी भर गया, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। कई बाइक और स्कूटर बीच सड़क में बंद हो गए, जबकि लोगों को घुटनों तक पानी में होकर निकलना पड़ा।

अलबतिया रोड, पृथ्वीनाथ फाटक 100 फीट रोड, मानस नगर, एमजी रोड, रामबाग, आवास विकास सहित कई प्रमुख इलाकों में बारिश रुकने के घंटों बाद भी पानी नहीं निकला। इससे कार्यालय जाने वाले लोगों, स्कूली बच्चों और स्थानीय निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

वहीं, सीएम ग्रिड योजना के तहत शहर में चल रहे अधूरे निर्माण कार्यों ने हालात और खराब कर दिए। दिल्ली गेट, कालिंदी विहार, इंद्रापुरम और कोठी मीना बाजार–मारुति एस्टेट रोड पर पहले से चल रही खुदाई के कारण बारिश के बाद सड़कें कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो गईं। कई स्थानों पर सड़क धंसने की स्थिति भी सामने आई, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई।

गौरतलब है कि हाल ही में जिलाधिकारी मनीष बंसल ने सीएम ग्रिड योजना की समीक्षा बैठक में संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को कार्यों में तेजी लाने तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

नगर निगम ने दावा किया था कि 15 जून तक शहर के सभी नालों की सफाई पूरी कर ली जाएगी। आगरा में कुल 410 नाले हैं, जिनमें 18 बड़े, 151 मझोले और 241 छोटे नाले शामिल हैं। हालांकि पहली प्रभावी बारिश में ही व्यापक जलभराव की स्थिति ने नाला सफाई अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बारिश के दौरान शहर को जलभराव से राहत नहीं मिल पा रही है।

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