विकास के दावों की खुली पोल: हंसपुरा में बारिश के बीच तिरपाल ढककर किया गया दाह संस्कार
श्मशान घाट पर पक्की छत तक नहीं, मानसून की पहली बारिश में ही उजागर हुई प्रशासन की घोर उपेक्षा
फ़तेहपुर सीकरी:- ग्रामीण विकास और मूलभूत सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच फ़तेहपुर सीकरी विकासखंड का हंसपुरा गांव प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की घोर उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। गांव के श्मशान घाट में एक पक्के टीनशेड तक की व्यवस्था न होने के कारण बारिश के बीच ग्रामीणों को तिरपाल का सहारा लेकर शव का अंतिम संस्कार करने पर मजबूर होना पड़ा।
घटना मंगलवार सुबह की है, जब गांव के निवासी सत्यप्रकाश सक्सैना का आकस्मिक निधन हो गया। जब शोकाकुल परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचे, तो झमाझम बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट पर सिर छुपाने और चिता को भीगने से बचाने के लिए कोई पक्की छत या टीनशेड मौजूद नहीं था। मजबूरी में ग्रामीणों ने चारों तरफ से तिरपाल तानकर जैसे-तैसे दाह संस्कार की प्रक्रिया पूरी की।
मानसून की शुरुआत में ही खुली व्यवस्था की पोल
अभिलेखों और सरकारी दावों में भले ही विकास की बातें की जा रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मानसून की शुरुआती बारिश ने ही गांव की बदहाली की तस्वीर साफ कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब शुरुआती दिनों में यह हाल है, तो आने वाले पूरे मानसून सीजन में किस कदर दुश्वारियों का सामना करना पड़ेगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। किसी इंसान की अंतिम विदाई में भी इस तरह की अव्यवस्था बेहद दुखद और शर्मनाक है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को जनता की मूलभूत समस्याओं से कोई सरोकार नहीं रह गया है।
ग्रामीणों ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए बताया कि श्मशान घाट में टीनशेड न होना कोई नई समस्या नहीं है। वे लंबे समय से पक्के निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं।
घटना के बाद समाजसेवी सुनील कुमार पाराशर ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि हंसपुरा गांव के श्मशान घाट में जल्द से जल्द पक्के टीनशेड और अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण कराया जाए, ताकि किसी को अपनी अंतिम यात्रा में इस तरह का कष्ट और अपमान न सहना पड़े।