30 हजार की रिश्वत मांगने वाला दरोगा पहले भी 10 हजार लेने के आरोप में हो चुका है निलंबित, दो साल में दो बार छात्रों को बनाया निशाना
आगरा। फतेहाबाद थाने में तैनात दरोगा धीरेंद्र यादव एक बार फिर रिश्वत मांगने के आरोपों को लेकर चर्चा में है। छात्र से 30 हजार रुपये मांगने का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामला सुर्खियों में आने के बाद दरोगा को निलंबित कर दिया गया है और प्रकरण की जांच एसीपी फतेहाबाद को सौंपी गई है। खास बात यह है कि धीरेंद्र यादव पर इससे पहले भी अंडर ट्रेनिंग के दौरान रिश्वत लेने का आरोप लग चुका है और उस मामले में भी उसे निलंबित किया गया था।
वायरल ऑडियो में एक छात्र और दरोगा के बीच बातचीत सुनाई दे रही है। छात्र कथित तौर पर अपना नाम मुकदमे से निकलवाने के लिए रकम को लेकर बातचीत करता है। ऑडियो में दरोगा की ओर से 30 हजार रुपये की मांग किए जाने की बात सामने आती है। छात्र पूछता है कि यह रकम सिर्फ उसके लिए है या सभी लोगों के नाम निकलवाने के लिए। इस पर दरोगा कथित तौर पर जवाब देता है कि उसने सभी का ठेका नहीं ले रखा है।
बातचीत में छात्र बताता है कि उसके साथ दो अन्य लोग भी थे और उनसे भी बात कर लेता है। इस पर दरोगा कथित तौर पर उससे बात करने के लिए कहता है और पैसे न देने पर शाम को मुकदमा दर्ज होने की बात कहता है। ऑडियो में एफआईआर की कॉपी भेजने की बात भी सामने आती है।
ऑडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और आगरा कमिश्नरेट पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। सोशल मीडिया पर लोग पुलिसकर्मी की कार्यशैली को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दरोगा को निलंबित कर दिया और जांच एसीपी फतेहाबाद को सौंप दी।
अंडर ट्रेनिंग में भी रिश्वत लेने का लगा था आरोप
दरोगा धीरेंद्र यादव का विवादों से यह पहला सामना नहीं बताया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2025 में अंडर ट्रेनिंग के दौरान थाना एत्माद्दौला में तैनाती के समय भी उस पर एक छात्र से रिश्वत लेने का आरोप लगा था।
बताया गया कि पुलिस ने हेलमेट और आवश्यक कागजात नहीं होने के कारण एक छात्र की मोटरसाइकिल थाने में खड़ी करा ली थी। छात्र का आरोप था कि मोटरसाइकिल करीब चार दिन तक थाने में रखी गई और उसे छोड़ने के नाम पर दरोगा धीरेंद्र यादव ने 10 हजार रुपये लिए। शिकायत के बाद तत्कालीन डीसीपी स्तर से मामले की जांच कराई गई थी और धीरेंद्र यादव को निलंबित किए जाने की बात सामने आई थी।
बहाली के बाद उसकी तैनाती पूर्वी जोन में हुई और अब फतेहाबाद में छात्र से 30 हजार रुपये मांगने का कथित ऑडियो सामने आने के बाद वह फिर कार्रवाई की जद में आ गया है। यानी करीब दो साल के भीतर छात्रों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में उसका नाम रिश्वत के आरोपों में सामने आया है।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले ने पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों पर होने वाली कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग में चर्चा है कि ऐसे कई पुलिसकर्मी हैं, जिन पर रिश्वत लेने के आरोप लगे और प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उन्हें निलंबित या लाइन हाजिर किया गया। लेकिन कुछ समय बाद बहाली के बाद उनमें से कई पुलिसकर्मी दोबारा थाने और चौकियों की जिम्मेदारी संभालते नजर आए।
वहीं पुलिस अधिकारियों की ओर से समय-समय पर यह कहा जाता रहा है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में कार्रवाई झेलने वाले पुलिसकर्मियों को महत्वपूर्ण थाना या चौकी की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। ऐसे में धीरेंद्र यादव प्रकरण के बाद विभाग के भीतर भी इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
फिलहाल वायरल ऑडियो और पुराने प्रकरण को लेकर जांच चल रही है। फतेहाबाद के मौजूदा मामले में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल ऑडियो में सामने आए आरोपों की वास्तविकता क्या है और दरोगा के खिलाफ आगे क्या विभागीय कार्रवाई की जाती है।