आगरा समेत पूरे यूपी में एनालॉग पनीर पर शिकंजा, डेयरी प्रोडक्ट्स पर भी रोक; जानिए क्या है एनालॉग पनीर और कैसे करें पहचान
महाराष्ट्र के बाद यूपी में भी कार्रवाई के निर्देश, पकड़े जाने पर लाइसेंस निलंबन और उत्पादन बंद कराने तक की कार्रवाई; आगरा में फास्ट फूड से लेकर मोमोज और चाउमीन तक में पनीर का बढ़ता इस्तेमाल
आगरा। महाराष्ट्र से शुरू हुई एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर कार्रवाई की मुहिम अब दूसरे राज्यों तक पहुंच गई है। महाराष्ट्र के बाद छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश में कार्रवाई के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के खिलाफ सख्ती के निर्देश जारी किए गए हैं।
उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से 15 अगस्त को जारी संशोधित आदेश में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के निर्माण और बिक्री के मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कार्रवाई के तहत प्रतिष्ठान का निर्माण कार्य बंद कराने के साथ खाद्य लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
आगरा में पनीर की बढ़ती डिमांड बनी चिंता
आगरा में खान-पान के शौकीनों के बीच पनीर की डिमांड काफी अधिक है। अब पनीर केवल सब्जियों तक सीमित नहीं है, बल्कि फास्ट फूड, चाउमीन, मोमोज, आमलेट और कई अन्य व्यंजनों में भी इसका जमकर इस्तेमाल हो रहा है।
शहर के फूड मार्केट से लेकर सड़क किनारे लगने वाली ठेल-ढकेलों तक पनीर का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि उपभोक्ताओं को परोसा जा रहा हर पनीर वास्तव में दूध से बना पनीर ही है या फिर उसकी जगह एनालॉग पनीर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर को सामान्य भाषा में ऐसे उत्पाद के तौर पर समझा जा सकता है जो असली डेयरी पनीर का विकल्प बनाकर तैयार किया जाता है। इसमें दूध से बने पारंपरिक पनीर के बजाय वनस्पति तेल/फैट, स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह देखने में बिल्कुल सामान्य पनीर जैसा दिखाई दे सकता है, इसलिए आम ग्राहक के लिए इसे पहचानना आसान नहीं होता। व्यावसायिक स्तर पर इसका इस्तेमाल कम लागत में पनीर जैसा उत्पाद तैयार करने के लिए किया जा सकता है।
असली पनीर और एनालॉग पनीर में क्या अंतर?
असली पनीर दूध को फाड़कर तैयार किया जाता है। आमतौर पर दूध में नींबू का रस, सिरका या किसी अन्य खाद्य अम्लीय पदार्थ का इस्तेमाल कर दूध के ठोस हिस्से को अलग किया जाता है।
वहीं एनालॉग उत्पाद में पनीर जैसा रूप, बनावट और उपयोग देने के लिए अलग-अलग गैर-डेयरी सामग्री और एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसी वजह से दोनों देखने में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन उनकी सामग्री और पोषण संरचना अलग हो सकती है।
सस्ता होने के कारण बढ़ता इस्तेमाल
एनालॉग पनीर का एक बड़ा आकर्षण इसकी लागत हो सकती है। होटल, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड कारोबार में जहां बड़ी मात्रा में पनीर की जरूरत होती है, वहां कम लागत वाला विकल्प कारोबारियों के लिए आकर्षक हो सकता है।
हालांकि, उपभोक्ता को यह जानकारी होना जरूरी है कि वह जो उत्पाद खा रहा है, वह वास्तव में डेयरी पनीर है या कोई एनालॉग उत्पाद।
सेहत के लिए कितना नुकसानदायक?
एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉ. प्रभात अग्रवाल के अनुसार, एनालॉग पनीर की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल सामग्री पर स्वास्थ्य प्रभाव निर्भर कर सकते हैं। यदि किसी उत्पाद में अधिक मात्रा में वनस्पति वसा, स्टार्च या अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया है तो उसका पोषण प्रोफाइल सामान्य दूध से बने पनीर से अलग होगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे उत्पादों का अत्यधिक सेवन संतुलित आहार के लिए उचित नहीं माना जा सकता। इसलिए उपभोक्ताओं को उत्पाद की सामग्री और लेबल की जानकारी देखकर ही खरीदारी करनी चाहिए।
कैसे पहचानें असली और एनालॉग पनीर?
सिर्फ देखकर एनालॉग पनीर और असली पनीर की पहचान करना हमेशा आसान नहीं होता। फिर भी कुछ सामान्य संकेतों पर ध्यान दिया जा सकता है।
असली पनीर सामान्यतः मुलायम, दूधिया और प्राकृतिक स्वाद वाला होता है। वहीं कुछ एनालॉग उत्पादों में अलग बनावट महसूस हो सकती है और वे अधिक रबड़ जैसे या चिपचिपे लग सकते हैं। स्वाद और बनावट में भी अंतर महसूस हो सकता है।
हालांकि, केवल स्वाद, रंग या बनावट के आधार पर किसी उत्पाद को निश्चित रूप से एनालॉग पनीर घोषित नहीं किया जा सकता। इसकी पुष्टि के लिए सामग्री की जांच या अधिकृत खाद्य परीक्षण जरूरी है।
ग्राहकों के लिए जरूरी सावधानी
पनीर खरीदते समय उपभोक्ताओं को पैकेट पर दी गई सामग्री, उत्पाद का नाम, निर्माता की जानकारी और अन्य लेबल विवरण जरूर देखना चाहिए। खुले में बिकने वाले पनीर की गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत की जा सकती है।
आगरा में पनीर की बढ़ती खपत को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई और बाजार में बिक रहे पनीर की गुणवत्ता की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अब देखना होगा कि एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर प्रदेश में जारी सख्ती का आगरा के होटल, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड कारोबार पर कितना असर पड़ता है।