अंगदान से मिल सकता है नौ जिंदगियों को नया जीवन, आगरा में जागरूकता अभियान तेज - समाचार RIGHT

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गुरुवार, 13 अगस्त 2026

अंगदान से मिल सकता है नौ जिंदगियों को नया जीवन, आगरा में जागरूकता अभियान तेज

अंगदान से मिल सकता है नौ जिंदगियों को नया जीवन, आगरा में जागरूकता अभियान तेज

आगरा। देश में हर दिन बड़ी संख्या में मरीज अंग प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं, लेकिन अंगों की उपलब्धता और जरूरत के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक मृत व्यक्ति के अंगों से कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। इसी उद्देश्य से आगरा में अंगदान को लेकर जागरूकता अभियान तेज किया गया है।

इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणवीर सिंह त्यागी ने कहा कि दक्षिण भारत की तुलना में उत्तर भारत में अंगदान को लेकर जागरूकता अभी भी कम है। लोगों के मन में अंगदान से जुड़े कई भ्रम और संकोच हैं। इन्हें दूर कर अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।

सिनर्जी प्लस हॉस्पिटल में पोस्टर का विमोचन

शुक्रवार को सिकंदरा बाईपास स्थित सिनर्जी प्लस हॉस्पिटल में इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन की ओर से अंगदान जागरूकता अभियान के तहत पोस्टर का विमोचन किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणवीर सिंह त्यागी के साथ डॉ. राकेश त्यागी, डॉ. अरविंद यादव, डॉ. रजनीश मिश्रा और डॉ. दीप्तिमाला अग्रवाल ने संयुक्त रूप से पोस्टर का विमोचन किया।

इस दौरान चिकित्सकों ने अंगदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोगों से इससे जुड़े भ्रम दूर करने और समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।

पूरे अगस्त चलेगा जागरूकता अभियान

डॉ. रणवीर सिंह त्यागी ने बताया कि अगस्त माह में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का समापन 31 अगस्त को होगा। इस अवसर पर शहर के प्रबुद्ध वर्ग को अंगदान की आवश्यकता और इसके महत्व की जानकारी दी जाएगी तथा लोगों से अंगदान का संकल्प लेने की अपील की जाएगी।

अगस्त में अंगदान से जुड़े महत्वपूर्ण जागरूकता दिवस भी मनाए जाते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है।

स्कूल-कॉलेज और सामाजिक संगठनों की भी भागीदारी

अंगदान को जनआंदोलन बनाने के लिए स्कूल-कॉलेज, विभिन्न समितियों, सामाजिक संगठनों और सरकारी विभागों के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि अंगदान के बारे में सही और वैज्ञानिक जानकारी लोगों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

यदि मृत्यु के बाद अधिक लोग अंगदान का संकल्प लें, तो प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे अनेक मरीजों को नया जीवन मिल सकता है।

जीवित रहते और मृत्यु के बाद किया जा सकता है अंगदान

विशेषज्ञों के अनुसार अंगदान मुख्य रूप से दो प्रकार से किया जा सकता है। जीवित व्यक्ति निर्धारित चिकित्सकीय नियमों के तहत एक किडनी या लीवर का कुछ हिस्सा दान कर सकता है। वहीं, मस्तिष्क मृत्यु यानी ब्रेन डेड की स्थिति में चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत महत्वपूर्ण अंगों को प्रत्यारोपण के लिए दान किया जा सकता है।

किडनी, लीवर, हृदय, फेफड़े, अग्न्याशय और आंत जैसे अंग प्रत्यारोपण के लिए दान किए जा सकते हैं। इसके अलावा कॉर्निया, त्वचा, हड्डियां और हृदय के वाल्व जैसे ऊतक भी दान किए जा सकते हैं।

एसएन मेडिकल कॉलेज में जल्द शुरू होगी किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा

आगरा में अंग प्रत्यारोपण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज में जल्द किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की तैयारी है। इसके साथ ही अंगों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।

इस सुविधा के विकसित होने से जरूरतमंद मरीजों को स्थानीय स्तर पर प्रत्यारोपण की सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही उपलब्ध अंगों को सुरक्षित रखने और आवश्यकता के अनुसार प्रत्यारोपण केंद्रों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

भ्रांतियां दूर करना सबसे बड़ी चुनौती

चिकित्सकों के मुताबिक भारत में अंग प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन अंगदान करने वालों की संख्या इसके मुकाबले कम है। उत्तर भारत में सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े भ्रम भी अंगदान के रास्ते में बड़ी चुनौती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को यह समझने की जरूरत है कि मृत्यु के बाद अंगदान किसी दूसरे परिवार के लिए उम्मीद और जीवन की नई शुरुआत बन सकता है। जागरूकता और सही जानकारी के जरिए अंगदान को सामाजिक आंदोलन का रूप दिया जा सकता है।

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