आगरा मेट्रो के दूसरे डिपो का निर्माण शुरू, 28 ट्रेनों के संचालन और रखरखाव को मिलेगी नई ताकत
फूल सैयद चौराहे के पास बनेगा दूसरा डिपो, दोनों डिपो आपस में जुड़ेंगे; दोनों कॉरिडोर में जरूरत के मुताबिक ट्रेनों के इस्तेमाल की सुविधा
आगरा। ताजनगरी में मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। गुरुवार को फूल सैयद चौराहे के पास आगरा मेट्रो के दूसरे डिपो के निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ पूजा-अर्चना के साथ किया गया। दूसरे डिपो के तैयार होने और इसे पहले डिपो से जोड़ने के बाद आगरा मेट्रो के दोनों कॉरिडोर के संचालन और ट्रेनों के रखरखाव की व्यवस्था को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
निर्माण कार्य के शुभारंभ के दौरान आगरा मेट्रो के परियोजना निदेशक अरविंद राय समेत यूपीएमआरसी के वरिष्ठ अधिकारी, इंजीनियर और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने डिपो से संबंधित निर्माण कार्यों की शुरुआत कराई और परियोजना की प्रगति की जानकारी ली।
पुरानी मंडी में पहले से ऑपरेशनल है पहला डिपो
आगरा मेट्रो का पहला डिपो पुरानी मंडी स्थित 15वीं वाहिनी पीएसी परिसर में बनाया गया है, जो वर्तमान में पूरी तरह ऑपरेशनल है। इसी डिपो से प्राथमिक सेक्शन में मेट्रो ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
अब फूल सैयद चौराहे के पास दूसरे डिपो का निर्माण शुरू होने से मेट्रो के आगामी विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है। यूपीएमआरसी के अनुसार, दूसरे डिपो के निर्माण के साथ कॉरिडोर-2 के स्टेशनों का निर्माण भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं कॉरिडोर-1 के शेष भूमिगत हिस्से में मेट्रो सेवा के विस्तार की दिशा में भी काम जारी है।
दोनों डिपो के बीच बनेगा कनेक्शन
दूसरे डिपो की खास बात यह होगी कि इसे पहले डिपो के नजदीक विकसित किया जा रहा है और दोनों डिपो को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे दोनों कॉरिडोर के बीच ट्रेनों की आवाजाही और परिचालन व्यवस्था को अधिक सुगम बनाया जा सकेगा।
पहले दूसरे डिपो को कालिंदी विहार क्षेत्र में बनाने का प्रस्ताव था। ऐसी स्थिति में दोनों कॉरिडोर के बीच ट्रेन संचालन और रखरखाव के लिए अलग व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ सकती थी। अब डिपो को एक-दूसरे के करीब विकसित किए जाने से परिचालन और रखरखाव के संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की संभावना है।
एकीकृत व्यवस्था से 28 ट्रेनों के इस्तेमाल में मिलेगी सहूलियत
आगरा मेट्रो के दोनों कॉरिडोर के लिए कुल 28 ट्रेनें प्रस्तावित हैं। इनमें 16 ट्रेनें कॉरिडोर-2 और 12 ट्रेनें कॉरिडोर-1 के लिए निर्धारित की जानी थीं। दोनों डिपो को आपस में जोड़ने की योजना से ट्रेनों को जरूरत के अनुसार दोनों कॉरिडोर में इस्तेमाल करने में सहूलियत मिल सकेगी।
इसका फायदा यह होगा कि किसी एक कॉरिडोर पर परिचालन की जरूरत बढ़ने पर ट्रेन उपलब्धता को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकेगा। इससे मेट्रो संचालन को अधिक लचीला बनाने में मदद मिलेगी।
रखरखाव के संसाधनों का भी बेहतर इस्तेमाल
दोनों डिपो को जोड़ने से ट्रेनों के रखरखाव में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है। अलग-अलग स्थानों पर डिपो होने की स्थिति में दोनों जगह रखरखाव से जुड़ी मशीनरी और अन्य संसाधनों की जरूरत पड़ती। वहीं आपस में जुड़े डिपो होने से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
कॉरिडोर-2 के निर्माण को मिलेगी गति
दूसरे डिपो का निर्माण ऐसे समय शुरू हुआ है, जब कॉरिडोर-2 के स्टेशनों और अन्य निर्माण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके पूरा होने पर शहर के नए हिस्से मेट्रो नेटवर्क से जुड़ेंगे। साथ ही कॉरिडोर-1 के शेष भूमिगत हिस्से में भी मेट्रो सेवा के विस्तार की तैयारियां चल रही हैं।
यूपीएमआरसी के अधिकारियों के अनुसार, दोनों डिपो को जोड़ने की व्यवस्था भविष्य में ट्रेन संचालन, रखरखाव और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे आगरा मेट्रो के दोनों कॉरिडोर को एकीकृत परिचालन व्यवस्था का लाभ मिलने की उम्मीद है।