7 दिन में आने वाली स्कूल जांच रिपोर्ट 117 दिन बाद भी गायब, टीम पापा ने डीएम से मांगी जवाबदेही
निजी स्कूलों की मनमानी और पाठ्यसामग्री सिंडिकेट की शिकायत पर 6 जांच टीमें बनी थीं, 2808 घंटे बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने का आरोप
आगरा। निजी स्कूलों की कथित मनमानी और पाठ्यसामग्री के नाम पर चल रहे सिंडिकेट की शिकायत पर जिला प्रशासन की ओर से गठित जांच समितियों की रिपोर्ट 117 दिन बाद भी सामने नहीं आने का मामला तूल पकड़ गया है। प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स (टीम पापा) के संस्थापक मनोज शर्मा ने सोमवार को जिलाधिकारी को स्मरण पत्र सौंपकर जांच रिपोर्ट लंबित रहने पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
टीम पापा के अनुसार, आगरा जनपद के निजी सीबीएसई, आईसीएसई और यूपी बोर्ड स्कूलों में मनमानी और पाठ्यसामग्री के नाम पर अभिभावकों से कथित तौर पर वसूली से संबंधित शिकायत का जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया था। इसके बाद 6 मई 2026 को आदेश संख्या बेसिक/1852-58 जारी कर छह संयुक्त प्रशासनिक एवं शिक्षा अधिकारियों की जांच टीमें गठित की गई थीं।
टीम पापा का दावा है कि जिलाधिकारी के आदेश में सभी जांच टीमों को एक सप्ताह यानी सात दिन के भीतर साक्ष्यों सहित अपनी जांच आख्या जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपने के निर्देश दिए गए थे। संगठन का आरोप है कि निर्धारित सात दिन की समय-सीमा बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई और अब आदेश जारी होने के 117 दिन यानी 2808 घंटे गुजर चुके हैं।
टीम पापा के संस्थापक मनोज शर्मा ने कहा कि जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेश के बावजूद जांच रिपोर्ट का इतने लंबे समय तक लंबित रहना संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक आदेशों के अनुपालन में इतनी देरी होगी तो आम अभिभावकों की शिकायतों का समाधान कैसे होगा।
मनोज शर्मा ने जिलाधिकारी से मांग की कि सभी छह जांच दलों से तत्काल जवाबदेही तय करते हुए जांच रिपोर्ट मंगाई जाए और उसे संबंधित पटल पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि जांच के निष्कर्ष सामने आने से अभिभावकों को पूरे मामले की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति उनका भरोसा भी मजबूत होगा।
टीम पापा ने कहा कि मामला बड़ी संख्या में अभिभावकों से जुड़ा है, इसलिए जांच को अनावश्यक रूप से लंबित रखने के बजाय प्रशासन को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। संगठन ने जिलाधिकारी से संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेकर जांच रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत कराने की मांग की है।
हालांकि, जांच रिपोर्ट लंबित रहने के संबंध में संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। प्रशासन की ओर से रिपोर्ट की वर्तमान स्थिति और देरी के कारणों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मिलने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।