जैन संतों के दर्शन कर अभिभूत हुए झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, बोले—‘मेरा सौभाग्य है कि मुझे आपके दर्शन मिले’ - समाचार RIGHT

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सोमवार, 28 सितंबर 2026

जैन संतों के दर्शन कर अभिभूत हुए झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, बोले—‘मेरा सौभाग्य है कि मुझे आपके दर्शन मिले’

जैन संतों के दर्शन कर अभिभूत हुए झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, बोले—‘मेरा सौभाग्य है कि मुझे आपके दर्शन मिले’

छीपीटोला जैन मंदिर में क्षमावाणी पर्व का आयोजन, राज्यसभा सांसद नवीन जैन और विधायक जीएस धर्मेश भी रहे मौजूद

आगरा। छीपीटोला स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे क्षमावाणी पर्व संतचर्या कार्यक्रम में रविवार को झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार पहुंचे। उन्होंने श्रमण मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज, श्रमण मुनि श्री 108 शील सागर महाराज और श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर महाराज के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान राज्यसभा सांसद नवीन जैन और विधायक जीएस धर्मेश भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में पूज्य मुनिश्री द्वारा रचित शास्त्रों का विमोचन भी किया गया।

राज्यपाल संतोष गंगवार ने जैन संतों को नमन करते हुए कहा कि उनका यहां आना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि वह ऐसे राज्य के राज्यपाल हैं, जहां जैन धर्म के अनेक महात्माओं ने मोक्ष और निर्वाण प्राप्त किया है। सम्मेद शिखर की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरे देश और दुनिया के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।

उन्होंने कहा कि मुनिवरों के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए सौभाग्य का अवसर है। उन्होंने विश्वास जताया कि संतों के मार्गदर्शन से आगरा की धरती भी आध्यात्मिक रूप से कृतार्थ होगी। राज्यपाल ने संतों से देश और प्रदेश की जनता के लिए प्रेम और आशीर्वाद बनाए रखने का आग्रह किया।

‘क्षमावाणी अंतर्मन को निर्मल करने का पर्व’

राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने कहा कि क्षमावाणी केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन को निर्मल करने, अहंकार और द्वेष का त्याग करने तथा सभी जीवों के प्रति मैत्रीभाव स्थापित करने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन हमें ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ के भाव के साथ जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगने और दूसरों को हृदय से क्षमा करने की प्रेरणा देता है।

समत्व सागर महाराज ने बताया सम्मेद शिखर का आध्यात्मिक महत्व

मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज ने अपने संबोधन में झारखंड स्थित सम्मेद शिखर पर्वत के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सम्मेद शिखर सामान्य पर्वत नहीं है, बल्कि जैन परंपरा में इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व है। उन्होंने झारखंड और बिहार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए चंद्रगुप्त मौर्य के जीवन के अंतिम चरण में दिगंबर मुनि पद धारण करने और समाधि प्राप्त करने की परंपरा का भी उल्लेख किया।

मुनिश्री ने भारत नाम की परंपरा, सम्राट भरत और भगवान महावीर की देशना से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान महावीर की शिक्षाओं का संदेश व्यापक मानव कल्याण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने धर्म, संयम, अहिंसा और आत्मशुद्धि के मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मंदिर पंचायती कमेटी से संदेश जैन, अध्यक्ष मनोज बल्लो, महामंत्री राजीव जैन, कोषाध्यक्ष अक्षय जैन बंटी, बबली जैन, राकेश जैन रखी, दीपक जैन बोतल वाले, संजीव जैन बोरे, प्रवीण जैन नेता, सुरेश सोनी जैन, नीरज जैन, निर्मल मोठ्या, बॉबी जैन, हेमंत जैन, अक्षय जैन, मुरारी लाल जैन, सतेंद्र जैन साहूला, आशु जैन, रोहित जैन, आयुष जैन सहित मीडिया प्रभारी राहुल जैन और बड़ी संख्या में सकल जैन समाज के लोग मौजूद रहे।

क्षमावाणी पर्व का यह आयोजन धर्म, ज्ञान और साहित्य की उस परंपरा का संदेश देता नजर आया, जो सत्य, अहिंसा, संयम, क्षमा और सदाचार के मूल्यों के माध्यम से समाज को आत्मचिंतन और सद्भाव की दिशा में प्रेरित करती है।

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