क्षमावाणी महापर्व में पहुंचे राज्यपाल संतोष गंगवार, दिया क्षमा और सद्भाव का संदेश
छीपीटोला में मुनिश्री समत्वसागर, शीलसागर और सुप्रभातसागर महाराज के सान्निध्य में आयोजन, राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने भी की सहभागिता
आगरा। पर्युषण महापर्व के समापन अवसर पर छीपीटोला स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैसवाल जैन उपरोंचिया पंचायती मंदिर के तत्वावधान में रविवार को पारंपरिक क्षमावाणी महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। श्री पार्श्वधाम, बालूगंज में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे आयोजन में क्षमा, प्रेम, मैत्री, करुणा और भाईचारे का संदेश गूंजता रहा।
कार्यक्रम युवा प्रणेता मुनिश्री समत्वसागर जी महाराज, मुनिश्री शीलसागर जी महाराज एवं मुनिश्री सुप्रभातसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में संपन्न हुआ। महिलाओं ने भक्तिगीत और मंगलाचरण प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद संतों के सान्निध्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की और जैन समाज की ओर से राज्यपाल का स्वागत-सम्मान किया। इस दौरान उन्हें क्षमावाणी पर्व की शुभकामनाएं दी गईं।
क्षमावाणी अंतर्मन को निर्मल करने का पर्व : नवीन जैन
राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने कहा कि क्षमावाणी केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अंतर्मन को निर्मल करने, अहंकार और द्वेष का त्याग करने तथा सभी जीवों के प्रति मैत्रीभाव स्थापित करने का पर्व है। ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ का भाव हमें जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए हृदय से क्षमा मांगने और दूसरों की गलतियों को भी खुले मन से क्षमा करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के सिद्धांतों में सत्य, अहिंसा, संयम, करुणा और अपरिग्रह का विशेष महत्व है। वर्तमान समय में तनाव और मतभेद के बीच जैन दर्शन शांति, सद्भाव और मानवता का मार्ग दिखा सकता है। धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका उद्देश्य व्यक्ति के आचरण में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
क्षमा आत्मशुद्धि और मन की निर्मलता का मार्ग : मुनिश्री
मुनिश्री समत्वसागर जी महाराज ने कहा कि क्षमा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मन की निर्मलता का मार्ग है। मनुष्य को अहंकार, क्रोध और वैमनस्य का त्याग कर प्रेम, करुणा और मैत्री की भावना अपनानी चाहिए। क्षमावाणी पर्व आपसी मनमुटाव को भुलाकर रिश्तों में मधुरता लाने और संबंधों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
क्षमा समाज को जोड़ने वाली भावना : राज्यपाल
राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि क्षमावाणी का पर्व भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में क्षमा, आत्मसंयम और सद्भाव के महत्व को रेखांकित करता है। क्षमा की भावना व्यक्ति और समाज दोनों को जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने जैन संतों के त्याग, तपस्या और संयम को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।
राज्यपाल ने कहा कि भगवान महावीर के अहिंसा और शांति के संदेश की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। प्रेम, भाईचारे और सद्भाव को मजबूत करने में ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि क्षमावाणी जैसे पर्व नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
शास्त्रों का हुआ विमोचन
समारोह में आगरा के श्रेष्ठियों द्वारा चित्र अनावरण और दीप प्रज्ज्वलन किया गया। इसके बाद मुनिश्री समत्वसागर जी महाराज के समक्ष शास्त्र भेंट किए गए। मुनिश्री द्वारा रचित शास्त्रों का विमोचन भी किया गया। वक्ताओं ने धार्मिक ग्रंथों को समाज की ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए आत्मचिंतन, संयम और सदाचार के लिए प्रेरणादायी बताया।
एक-दूसरे से मांगी क्षमा, मैत्री का दिया संदेश
कार्यक्रम के समापन पर जैन समाज के लोगों ने क्षमावाणी की परंपरा के अनुरूप एक-दूसरे से क्षमा याचना की। श्रद्धालुओं ने आपसी गिले-शिकवे भुलाकर प्रेम, मैत्री और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया। समारोह में मंदिर अध्यक्ष मनोज जैन बल्लो, महामंत्री राजीव जैन, उपमंत्री संजीव जैन, अक्षय जैन, दीपक जैन बोतल वाले, हेमंत जैन, सतेन्द्र जैन, प्रवीन जैन नेता, आयुष जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन सहित छीपीटोला जैन समाज के पदाधिकारी, महिलाएं, युवा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।