इप्टा के ‘रामी’ नाटक ने दिया पर्यावरण संरक्षण का सार्थक संदेश - समाचार RIGHT

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सोमवार, 7 सितंबर 2026

इप्टा के ‘रामी’ नाटक ने दिया पर्यावरण संरक्षण का सार्थक संदेश

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तभी जीवन में आए खुशहाली!!

इप्टा के ‘रामी’ नाटक ने दिया पर्यावरण संरक्षण का सार्थक संदेश

आज भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) द्वारा माथुर वैश्य सभा भवन में ‘रामी’ नाटक की बेहद प्रभावशाली प्रस्तुति की गई। प्रकृति, पर्यावरण और मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखे इस नाटक ने दर्शकों को गहरे तक प्रभावित किया और पर्यावरण संरक्षण का सार्थक संदेश दिया।

‘रामी’ जोधपुर, राजस्थान के प्रसिद्ध कहानीकार श्री सत्यनारायण जी की कहानी है, जिसका नाट्य रूपांतरण दिलीप रघुवंशी ने किया है और निर्देशन भी उन्हीं का रहा।

नाटक की कहानी एक बंजारन बच्ची रामी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो प्रकृति से बेहद प्रेम करती है। बरगद जैसा विशाल वृक्ष हो, कैर की झाड़ी, कुआँ या प्रकृति का कोई भी मनोहारी दृश्य—रामी उसे निहारने और महसूस करने में मग्न रहती है। इसी दौरान सत्या नामक एक बच्चे का परिवार उस इलाके में आता है। रामी और सत्या की दोस्ती हो जाती है और रामी उसे प्रकृति के अद्भुत संसार से परिचित कराती है।

समय बीतता है और सत्या के पिता का तबादला हो जाता है। दोनों बच्चे एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं। लगभग बीस वर्ष बाद सत्या वापस लौटता है और रामी को खोजता है। तब उसे पता चलता है कि जिस प्राकृतिक सौंदर्य को उसने बचपन में रामी के साथ महसूस किया था, वह औद्योगीकरण और शहरीकरण की भेंट चढ़ चुका है। प्रकृति को बचाने के प्रयास में रामी अपने प्राणों की आहुति दे देती है।

नाटक के माध्यम से आगरा इप्टा और निर्देशक दिलीप रघुवंशी ने पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और प्रकृति संरक्षण का अत्यंत सारगर्भित संदेश देने का सुखद प्रयास किया।

इस अवसर पर कहानीकार श्री सत्यनारायण जी विशेष रूप से जोधपुर से पधारे। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. ज्योत्सना रघुवंशी ने इप्टा के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1942 में बंगाल अकाल के दौरान राजेंद्र रघुवंशी ने बिशन खन्ना के साथ मिलकर एक कल्चरल स्क्वायड की स्थापना की थी। गीतों और नाटकों के माध्यम से लोगों में जागरूकता पैदा करने का यह अभियान आगे चलकर 1943 में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की विधिवत स्थापना का आधार बना। उन्होंने कहा कि रंगमंच ऐसा सशक्त माध्यम है, जो जनता से सीधे संवाद करता है। बीच में आई रुकावटों के बाद राजेंद्र रघुवंशी ने 1985 में इप्टा का राष्ट्रीय अधिवेशन कर संगठन में पुनः नवप्राण का संचार किया।

कहानीकार श्री सत्यनारायण जी का संयोजक नीरज मिश्रा ने माल्यार्पण कर स्वागत किया तथा आगरा इप्टा के अध्यक्ष सुबोध गोयल ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ से पधारे साहित्यकार जय प्रकाश का शकील चौहान ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।

नाटक में रामी की भूमिका में निवेदिता और सत्या की भूमिका में रविंदर ने सराहनीय अभिनय किया। वहीं सूत्रधार की भूमिका में असलम खान, लेखक की भूमिका में जय कुमार, ग्रामीण की भूमिका में पार्थो घोष तथा सत्या की माँ की भूमिका में पूजा पाराशर ने अपने-अपने पात्रों को जीवंत कर दिया। पार्श्व स्वर कुमकुम रघुवंशी का रहा।

संगीत संयोजन सिद्धार्थ रघुवंशी तथा संगीत संचालन परमानंद शर्मा ने किया। नृत्य संयोजन पूजा शर्मा का रहा, जबकि लाइटिंग व्यवस्था बब्बू ने संभाली। प्रबंधन की जिम्मेदारी शकील चौहान और शैलेन्द्र शर्मा ने निभाई। कार्यक्रम में कुमकुम रघुवंशी और मुक्ति किंकर का विशेष सहयोग रहा। रिकॉर्डिंग की जिम्मेदारी इमामुद्दीन ने संभाली और रूपसज्जा आनंद बंसल की रही।

कार्यक्रम के अंत में क्रांतिकारी रोशन लाल सुतेल स्मृति समिति की ओर से सभी प्रतिभागी कलाकारों को पुरस्कार प्रदान किए गए। धन्यवाद ज्ञापन इप्टा अध्यक्ष सुबोध गोयल ने किया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. शशि तिवारी, अनिल शुक्ला, प्रियंका मिश्रा, अनिल जैन, धर्मजीत सिंह सहित शहर के अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

‘रामी’ केवल एक नाटक नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का जीवंत स्मरण है—यदि पेड़ बचेंगे, तभी जीवन बचेगा और खुशहाली आएगी।

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