दशहरा शोभायात्रा की समिति को लेकर सियासी संग्राम, भाजपा-सपा गुट आमने-सामने - समाचार RIGHT

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शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

दशहरा शोभायात्रा की समिति को लेकर सियासी संग्राम, भाजपा-सपा गुट आमने-सामने

दशहरा शोभायात्रा की समिति को लेकर सियासी संग्राम, भाजपा-सपा गुट आमने-सामने


चार अक्टूबर की बैठक के फैसले को दरकिनार कर नई समिति बनाने का आरोप, भाजपा से जुड़े पार्षदों ने डीसीपी से की जांच की मांग

आगरा। विजयादशमी पर लोहामंडी से सेंट जोंस चौराहे तक निकलने वाली वर्षों पुरानी दशहरा शोभायात्रा इस बार आयोजन से पहले ही समिति के गठन को लेकर विवादों में घिर गई है। आयोजन समिति को लेकर भाजपा से जुड़े क्षेत्रीय पार्षदों और स्थानीय लोगों ने सवाल खड़े करते हुए पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) से शिकायत की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि चार अक्टूबर की बैठक में सामूहिक सहमति से लिए गए निर्णय को दरकिनार करते हुए कुछ लोगों ने अलग से नई समिति का गठन कर लिया।

समिति के गठन को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी से जुड़े गुटों के बीच टकराव के आरोप लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ी शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में समिति को लेकर पैदा हुआ विवाद समय रहते नहीं सुलझा तो आयोजन की व्यवस्थाओं और माहौल पर इसका असर पड़ सकता है।

11 सितंबर की बैठक में तय हुई थी चुनाव की रूपरेखा

शिकायत के अनुसार समिति गठन को लेकर 11 सितंबर को पार्षद शरद चौहान के निवास पर बैठक हुई थी। इसमें रामदास कटारा, पार्षद हेमंत प्रजापति, विक्रांत कुशवाह, विनय अग्रवाल, हिमांशु शिवहरे, विकास गुप्ता, अमित बंसल, अमित सिंह पटेल समेत क्षेत्र के कई लोग शामिल हुए थे।

बैठक में बताया गया कि दशहरा शोभायात्रा की आयोजन समिति पंजीकृत नहीं है और हर वर्ष चुनाव अधिकारियों तथा वरिष्ठ संरक्षक मंडल की मौजूदगी में समिति के गठन की प्रक्रिया होती है। इसी क्रम में पिछले वर्ष के आय-व्यय का हिसाब प्रस्तुत करने और नई व्यवस्था तय करने के लिए चार अक्टूबर को मंदिर परिसर में बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया था।

आय-व्यय के हिसाब को लेकर बैठक में बढ़ा विवाद

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक चार अक्टूबर को मंदिर परिसर में हुई बैठक में चुनाव अधिकारी बसंत श्रीवास्तव, रामदास कटारा और मटरू सिंह मौजूद थे। बैठक में पिछले वर्ष शोभायात्रा के आयोजन में हुए खर्च और प्राप्त धनराशि का ब्योरा मांगा गया। आरोप है कि आय-व्यय का पूरा हिसाब प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके बाद बैठक में विवाद की स्थिति बन गई।

शिकायत के अनुसार मामला बढ़ने पर चुनाव अधिकारियों ने मौजूद सदस्यों की राय ली। इसमें कथित तौर पर यह निर्णय हुआ कि इस वर्ष किसी व्यक्ति को अध्यक्ष या अन्य पदाधिकारी घोषित नहीं किया जाएगा और सभी कार्यकर्ताओं की सामूहिक सहभागिता से शोभायात्रा का आयोजन कराया जाएगा।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पहले भी समिति को लेकर विवाद की स्थिति बनने पर सामूहिक व्यवस्था के तहत शोभायात्रा का सफल आयोजन कराया जा चुका है। इसलिए चार अक्टूबर का फैसला विवाद को समाप्त करने की दिशा में सामूहिक सहमति से लिया गया था।

14 अक्टूबर को नई समिति की जानकारी से बढ़ी हलचल

शिकायतकर्ताओं के अनुसार चार अक्टूबर के बाद भी 13 अक्टूबर तक मंदिर परिसर में बैठकों का सिलसिला चलता रहा। व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सदस्यों को बैठकों की जानकारी दी जा रही थी और सामूहिक व्यवस्था के तहत शोभायात्रा निकालने को लेकर चर्चा चल रही थी।

इसी बीच 14 अक्टूबर को समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी सामने आई कि विनय अग्रवाल ने स्वयं को अध्यक्ष घोषित करते हुए नई आयोजन समिति का गठन कर लिया है। इसके बाद समिति से जुड़े लोगों और क्षेत्रीय निवासियों में नाराजगी की स्थिति बनने का दावा किया गया है।

शिकायतकर्ताओं ने इस समिति के गठन को चार अक्टूबर की बैठक में लिए गए कथित सामूहिक निर्णय के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि जब बैठक में इस वर्ष किसी पदाधिकारी को घोषित नहीं करने का फैसला हुआ था, तो उसके बाद नई समिति के गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

राजनीतिक हस्तक्षेप का भी लगाया आरोप

शिकायत में विनय अग्रवाल पर राजनीतिक उद्देश्य से समिति गठित करने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विनय अग्रवाल पूर्व में समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं और उनके इस कदम के पीछे निजी अथवा राजनीतिक हित हो सकते हैं।

हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शिकायत के अनुसार चुनाव अधिकारियों ने भी व्हाट्सएप ग्रुप पर नई समिति के गठन को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

डीसीपी से जांच और पुराने फैसले को बहाल करने की मांग

भाजपा से जुड़े क्षेत्रीय पार्षदों और स्थानीय नागरिकों ने डीसीपी को दिए शिकायती पत्र में पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं ने बैठक के रजिस्टर, चार अक्टूबर की बैठक में लिए गए निर्णय और पिछले आयोजनों से संबंधित आय-व्यय के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।

उनकी प्रमुख मांग है कि चार अक्टूबर को लिए गए कथित सर्वसम्मत निर्णय को बहाल किया जाए और दशहरा शोभायात्रा का आयोजन सामूहिक व्यवस्था के तहत कराया जाए। उनका कहना है कि समिति के गठन में पारदर्शिता और सभी पक्षों की सहभागिता जरूरी है, जिससे आयोजन को लेकर किसी तरह का विवाद खड़ा न हो।

मिश्रित आबादी वाले मार्ग से गुजरती है शोभायात्रा

शिकायतकर्ताओं ने शोभायात्रा के मार्ग और श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मामले को संवेदनशील बताया है। उनके मुताबिक लोहामंडी से सेंट जोंस चौराहे तक निकलने वाली शोभायात्रा मिश्रित आबादी वाले क्षेत्र से होकर गुजरती है और इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

ऐसे में समिति के गठन को लेकर चल रहा विवाद केवल आयोजन की व्यवस्थाओं तक सीमित न रहकर कानून-व्यवस्था के लिहाज से भी चिंता का विषय बन सकता है। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से समय रहते हस्तक्षेप कर विवाद का समाधान कराने की मांग की है, ताकि विजयादशमी का पर्व आपसी समन्वय, शांतिपूर्ण माहौल और वर्षों पुरानी परंपरा के अनुरूप संपन्न हो सके।

फिलहाल विवाद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि समिति के गठन से जुड़े दस्तावेजों, बैठकों के निर्णयों और दोनों पक्षों के दावों की जांच के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है।

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