आगरा:-आगरा मेट्रो के द्वितीय कॉरिडोर के तहत आगरा कैंट से आगरा कॉलेज तक के प्रायोरिटी स्ट्रेच का निर्माण कार्य तेजी से अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। लगभग सभी स्टेशनों ने अब अपना आकार लेना शुरू कर दिया है और स्टेशनों की सिविल संरचना का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके साथ ही सिस्टम्स से जुड़े कार्य, स्टेशन फिनिशिंग और पीईबी स्ट्रक्चर लगाने का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
प्रायोरिटी स्ट्रेच में आगरा कैंट, सदर बाजार, प्रतापपुरा, कलेक्ट्रेट और आगरा कॉलेज समेत कुल पांच स्टेशन प्रस्तावित हैं। सभी स्टेशनों पर निर्माण गतिविधियां तेज हैं। सिविल ढांचा तैयार होने के बाद अब स्टेशन परिसरों को अंतिम रूप देने पर जोर दिया जा रहा है।
तीन स्टेशनों पर सिस्टम्स रूम तैयार
आगरा कैंट, सदर बाजार और प्रतापपुरा मेट्रो स्टेशनों पर सिस्टम्स रूम तैयार हो चुके हैं और इनमें तकनीकी कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं। इन कमरों में सिग्नलिंग, एयर कंडीशनिंग और स्टेशन की विद्युत आपूर्ति से जुड़े उपकरण स्थापित किए जाएंगे। सिस्टम्स से संबंधित काम शुरू होने के साथ परियोजना सिविल निर्माण से आगे बढ़कर मेट्रो संचालन के लिए जरूरी तकनीकी ढांचे की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
आगरा कैंट स्टेशन पर पीईबी स्ट्रक्चर का काम शुरू
आगरा कैंट मेट्रो स्टेशन पर पीईबी यानी प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग स्ट्रक्चर लगाने का कार्य शुरू हो गया है। स्टेशन के ऊपरी हिस्से में लगाए जाने वाला यह स्ट्रक्चर स्टेशन को कवर देने के साथ उसके वास्तु स्वरूप को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।पीईबी स्ट्रक्चर में पॉलीकार्बोनेट शीट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन शीट्स से दिन के समय प्राकृतिक रोशनी स्टेशन के भीतर पहुंच सकेगी, जिससे कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। प्राकृतिक रोशनी के बेहतर उपयोग से स्टेशन को ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में भी मदद मिलेगी।
वायडक्ट और पिलर निर्माण अंतिम दौर में
प्रायोरिटी स्ट्रेच के वायडक्ट निर्माण की बात करें तो रावली को छोड़कर लगभग सभी पियर्स की कास्टिंग पूरी की जा चुकी है। रावली क्षेत्र में स्टील स्पैन के इरेक्शन के बाद शेष सिविल कार्य भी महीने के अंत तक लगभग पूरा होने की उम्मीद है।
मेट्रो के पिलर निर्माण में इन-सिटू तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, यानी पिलर का निर्माण मौके पर ही किया जाता है। वहीं यू-गर्डर और पियर कैप जैसी वायडक्ट की प्रमुख संरचनाएं कास्टिंग यार्ड में तैयार करने के बाद भारी क्रेन की सहायता से निर्धारित स्थान पर स्थापित की जाती हैं।
यू-गर्डर इरेक्शन का काम तेजी से आगे बढ़ा
प्रायोरिटी स्ट्रेच के वायडक्ट पर अधिकांश यू-गर्डर स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा स्टेशनों के लिए निर्धारित सभी 50 यू-गर्डर भी रखे जा चुके हैं। यू-गर्डर एलिवेटेड वायडक्ट की महत्वपूर्ण संरचना होते हैं। इनके इरेक्शन के बाद वायडक्ट का बड़ा हिस्सा आकार लेने लगता है और आगे ट्रैक बिछाने सहित अन्य तकनीकी कार्यों के लिए आधार तैयार होता है।
स्टेशन के प्रमुख गर्डर भी तैयारस्टेशन निर्माण से जुड़े प्रमुख सिविल स्ट्रक्चर का काम भी तेजी से पूरा किया गया है। स्टेशन निर्माण के लिए निर्धारित सभी 24 क्रॉस आर्म्स तैयार हो चुके हैं। इसके साथ ही कॉनकोर्स के लिए सभी 163 डबल-टी गर्डर, 40 कॉनकोर्स एल-गर्डर, 45 प्लेटफॉर्म एल-गर्डर और 56 प्लेटफॉर्म पाई-गर्डर का भी परिनिर्माण पूरा किया जा चुका है। पाई-गर्डर का आकार गणित के ‘π’ चिन्ह जैसा दिखाई देता है और स्टेशन प्लेटफॉर्म व संबंधित संरचनाओं के निर्माण में इसकी अहम भूमिका होती है।
फिनिशिंग कार्यों पर बढ़ा जोरसिविल संरचना तैयार होने के साथ ही अब स्टेशनों पर फिनिशिंग कार्य तेज कर दिए गए हैं। पत्थर लगाने, सतहों को अंतिम रूप देने और अन्य फिनिशिंग गतिविधियां चल रही हैं। निर्माण की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए प्रायोरिटी स्ट्रेच के अधिकांश प्रमुख सिविल कार्य अंतिम पड़ाव पर पहुंचते नजर आ रहे हैं।
रावली में स्टील स्पैन के इरेक्शन के बाद शेष सिविल कार्य भी तेजी से पूरा होने की उम्मीद है। इस तरह आगरा मेट्रो का द्वितीय कॉरिडोर अब केवल पिलर और वायडक्ट निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टेशन संरचनाओं, सिस्टम्स रूम, पीईबी स्ट्रक्चर और फिनिशिंग कार्यों के साथ मेट्रो संचालन के लिए जरूरी समग्र ढांचा आकार लेने लगा है।