मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर रद्द करने की मांग, भाकियू जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया के हाथ में भी लगी चोट; बिजली बिल और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे भी उठाए
आगरा:-मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में शुक्रवार को आगरा में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों का प्रदर्शन उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब किसानों और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के बीच धक्कामुक्की शुरू हो गई। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार जमीन पर गिर पड़े, जबकि भाकियू के जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया के हाथ में चोट लग गई। घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने सुभाष पार्क के सामने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं।
किसानों का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने और मतदाता सूची से हटाए गए पात्र नागरिकों का मतदान अधिकार बहाल करने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। किसान जिलाधिकारी को ज्ञापन देने के लिए कलेक्ट्रेट जाना चाहते थे, लेकिन एमएलसी चुनाव के मतदान को देखते हुए पुलिस ने उन्हें थाना नाई की मंडी में रोक लिया। इसके बाद किसानों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया तो मौके पर मौजूद अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनातनी बढ़ गई।
अधिकारी के इंतजार के बाद कलेक्ट्रेट कूच पर अड़े किसान
भाकियू नेताओं के अनुसार, प्रशासन की ओर से सुबह 11:30 बजे जिलाधिकारी के आने और ज्ञापन लेने का समय दिया गया था। दोपहर 12 बजे तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा तो किसानों में नाराजगी बढ़ गई। इसके बाद किसान नेताओं ने कलेक्ट्रेट की ओर मार्च करने का निर्णय लिया। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया।
इसी दौरान सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने किसानों से मौके पर ही ज्ञापन सौंपने को कहा, लेकिन किसान जिलाधिकारी को ज्ञापन देने की मांग पर अड़े रहे। इसी बात को लेकर कहासुनी बढ़ी और धक्कामुक्की होने लगी। घटनाक्रम के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट जमीन पर गिर पड़े, जबकि भाकियू जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया के हाथ में चोट लग गई। घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने सुभाष पार्क के सामने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
एसआईआर रद्द करने और मतदाताओं का अधिकार बहाल करने की मांग
किसानों ने ज्ञापन में एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने, मतदाता सूची से हटाए गए पात्र नागरिकों का मतदान अधिकार बहाल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जांच कर कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान किसी भी पात्र नागरिक का नाम नहीं काटा जाना चाहिए और प्रत्येक योग्य मतदाता को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिलना चाहिए।किसानों ने आंदोलन करने वाले लोगों के कथित उत्पीड़न की जांच कराने और चुनाव प्रक्रिया में सुधार किए जाने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्येक पात्र नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
405 किसानों के बिजली बिलों की गड़बड़ी का मुद्दा उठा
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन में टोरेंट पावर क्षेत्र के 405 किसानों के बिजली बिलों में कथित गड़बड़ियों को दूर कराने की मांग की गई। किसान नेताओं ने खेती के महत्वपूर्ण समय में बिजली कनेक्शन नहीं काटने की मांग करते हुए कहा कि बिजली की आपूर्ति बाधित होने से सिंचाई और कृषि कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने बिलों की विसंगतियों का समाधान कर किसानों को राहत देने की मांग की।
एत्मादपुर मदरा में भूमि अधिग्रहण पर जताई नाराजगी
किसानों ने एत्मादपुर मदरा में भूमि अधिग्रहण से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराने की मांग भी उठाई। किसान नेताओं का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि सर्किल रेट में लंबे समय से अपेक्षित वृद्धि नहीं होने के बावजूद किसानों की जमीन पुरानी दरों पर अधिग्रहित की जा रही है।किसानों ने भूमि अधिग्रहण के मामलों की समीक्षा कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की। उनका कहना था कि खेती उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है, इसलिए जमीन अधिग्रहित करते समय उनके हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
नजरबंदी की आशंका में रात में ही कलेक्ट्रेट पहुंचे थे जिलाध्यक्ष
भाकियू जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया ने बताया कि उन्हें नजरबंदी किए जाने की आशंका थी, जिसके चलते वह रात में ही कलेक्ट्रेट पहुंच गए थे। बाद में उन्हें अन्य पदाधिकारियों के साथ थाना नाई की मंडी ले जाया गया।प्रदर्शन में मंडल अध्यक्ष रणवीर सिंह चाहर, प्रदेश सचिव ओम प्रकाश सिंह, द्वारिका प्रसाद यादव, अजय राज शास्त्री, वेद प्रकाश पचौरी, श्यामवीर सिंह चाहर और नत्थू सिंह धाकरे समेत बड़ी संख्या में किसान नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।एसआईआर के विरोध से शुरू हुआ प्रदर्शन बिजली बिलों की गड़बड़ी और भूमि अधिग्रहण जैसे स्थानीय मुद्दों तक पहुंच गया। वहीं, ज्ञापन सौंपने को लेकर किसानों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुई धक्कामुक्की के बाद शहर में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई।