आगरा। ताजनगरी में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बचाने के दावों के बीच ताजमहल के नजदीक दो बड़े हरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। ताज व्यू पॉइंट के बराबर में स्थित 28वीं वाहिनी पीएसी कैंप के पास मंगलवार को दो हरे पेड़ों को काटे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
ताजमहल के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) बनाया गया है। इसके अंतर्गत आगरा सहित आसपास के क्षेत्रों का करीब 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल है। इस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। इसके बावजूद शहर में लगातार हरे पेड़ों की कटाई के मामले सामने आना पर्यावरण संरक्षण की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
ताजा मामला ताजमहल के नजदीक का है, जहां दो बड़े हरे पेड़ों पर आरी चलाकर उन्हें जमीन पर गिरा दिया गया। वायरल वीडियो में पेड़ों की कटाई होती दिखाई दे रही है। आरोप है कि कुछ महिलाओं ने अधिकारियों और स्थानीय दुकानदारों के कहने पर पेड़ों को काटा। हालांकि, इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की अनुमति और कटाई के वास्तविक कारणों की पुष्टि होना बाकी है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि ताजमहल जैसे विश्वविख्यात स्मारक के आसपास टीटीजेड के नियमों के तहत पेड़ों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? यदि पेड़ों की कटाई बिना अनुमति की गई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है?