आगरा में वक्फ की आय का हो रहा दुरुपयोग।
- मुतावल्ली कर रहें तानाशाही
- जनता मांग रही है, वक्फ की आय का हिसाब
आगरा। वक्फ संशोधन की चर्चा समूचे देश भर में हो रही है। मुसलमान संशोधन से खफा हैं। लेकिन इसके साथ ही मुस्लिम समाज में वक्फ के मुतावालियों के प्रति भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का मानना है मुतावल्ली खुली मनमानी करते हैं। वक्फ पर मुसलमानों का अधिकार है। लेकिन मुस्लिम समाज को मुतावल्ली हिसाब नही देते हैं। दरअसल, जिले में वक्फ की अनेकों संपत्तियां हैं। जानकारों के मुताबिक इन संपत्तियों से लाखों रुपए महीना किराया वसूला जाता है। और इस आय का कोई हिसाब किताब नहीं है। लोगों का मानना है वक्फ किसी की व्यक्तिगत जागीर नहीं है। पूरे समाज को वक्फ का किराया और अन्य तरीकों से मिलने वाली आय के पैसे की जानकारी होनी चाहिए। लेकिन मुतावल्ली इस पैसे का सही उपयोग नहीं करते हैं। वक्फ आय से आम मुसलमान को लाभ नहीं मिलता है। जबकि वक्फ की स्थापना गरीब मुसलमानों के विकास के लिए की गई थी। जिले में वक्फ की कई ऐसी संपत्तियां हैं। जिनकी आय का उपयोग नियमानुसार किया जाए। तो इससे मुसलमानों की आर्थिक स्थिति सुधर सकती है।
वक्फ पर काबिज मुतावल्ली अपना कार्य ठीक से नहीं करते हैं। जनता का हिसाब मांगने का अधिकार है। लेकिन मुतावल्ली मनमानी करते हैं। वक्फ में शिकायतें जाती हैं। लेकिन इनका कोई असर नहीं होता है।
वक्फ की संपत्ति गरीब लोगों के काम आनी चाहिए। यह किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। गरीब मुसलमान परेशान हैं। उनको वक्फ का कोई लाभ नहीं मिलता है। वक्फ के मुतावल्ली ठीक से काम नही करते हैं। मुतावल्लियों से हिसाब मांगना मुसलमानों का अधिकार है। यह इनका निजी मामला नही है। बल्कि जनता से पूछकर मुतावल्लियों को कार्य करना चाहिए।
मुतावल्ली काम सही से नहीं करते हैं। लोग हिसाब मांगते हैं तो वह हिसाब नही दे पाते हैं। मस्जिदों में हिसाब लगाया जाता है। जिसमे वक्फ की आय और खर्च की राशि दर्ज होती है। पहले इस तरह के बोर्ड लगते थे। लेकिन अब यह लोग बोर्ड नही लगाते हैं। मुतावल्लियों की तानाशाही चल रही है।
वक्फ की आय शिक्षा और स्वास्थ्य में लगनी चाहिए। जबकि ऐसा नहीं होता है। समाज की जरूरतों पर यह सभी समाज से दूरी बना लेते हैं।
मो सलीम का कहना है, मुतावल्ली अगर सही होते तो स्तिथि खराब नही होती। किराया जहां पहुंचना चाहिए, वहां नही पहुंचता है। मुतावल्ली हिसाब नही देते मनमानी करते हैं।
यामीन वारसी पूर्व पार्षद
यामीन वारसी पूर्व पार्षद हैं। और वक्फ मामलों को बेहद नजदीक से समझते हैं। उनका मानना है वक्फ के मुतावल्ली ठीक से काम नही करते हैं। कोई भी हिसाब किताब नहीं देते हैं। वक्फ में भी पूरा पैसा नही पहुंचाते हैं। यह लोग गुमराह करते हैं। मेंटेनेंस के नाम पर धांधली करते हैं।
मुन्ना भी मुस्लिम समाज ने ताल्लुक रखते हैं ।उनकी भी नाराजगी मुतावल्लियों से लंबे समय से बनी हुई है। उन्होंने वक्फ संशोधन की के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा। सख्ती इस बात की होनी चाहिए, की वक्फ से आने वाला किराया और आमदनी का हिसाब पता चल सके। इस पर गरीबों का हक है। यह लोग लखनऊ से बनकर आते हैं। और हिसाब नही देते हैं।
शोएब युवा है। और इस मामले पर उन्होंने कहा मुतावल्ली काम नही करते हैं। मेने अपनी जिंदगी में कभी किसी मुतावल्ली को हिसाब देते हुए नही देखा। उन्हें जनता को हिसाब दिखाना चाहिए।
शनिवार, 21 सितंबर 2024
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आगरा में वक्फ की आय का हो रहा दुरुपयोग। - मुतावल्ली कर रहें तानाशाही - जनता मांग रही है, वक्फ की आय का हिसाब
