बच्चों की मानसिक सेहत पर खतरा: महिला आयोग ने उठाए सवाल
गाजियाबाद में तीन नाबालिग बच्चियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना के बाद उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने स्कूलों में चल रही ऑनलाइन पढ़ाई और मोबाइल आधारित होमवर्क व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने इसे बच्चों की मानसिक सेहत से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बताते हुए साफ कहा है कि अब स्कूलों को बच्चों पर डिजिटल दबाव डालने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
क्या है मामला?
गाजियाबाद में तीन नाबालिग बच्चियों ने आत्महत्या कर ली, जिसके बाद महिला आयोग ने ऑनलाइन पढ़ाई और मोबाइल आधारित होमवर्क व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने कहा कि बच्चों पर ऑनलाइन पढ़ाई, मोबाइल फोन और डिजिटल कंटेंट का असर किस कदर गहरा और खतरनाक हो चुका है।
क्या कहा महिला आयोग ने?
महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई मजबूरी थी, लेकिन अब हालात सामान्य हो चुके हैं। इसके बावजूद कई स्कूल आज भी मोबाइल फोन के जरिए होमवर्क और पढ़ाई का दबाव बना रहे हैं। इससे बच्चे लगातार स्क्रीन से जुड़े रहते हैं, जो धीरे-धीरे डिजिटल लत, मानसिक तनाव, अवसाद और असुरक्षा को जन्म दे रही है।
क्या होगा आगे?