करहल थाने में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल बना मजाक, सिपाही कर रहे है एससी एसटी के प्रार्थना पत्रो की जांच, किये जा रहे फर्जी निस्तारण
मैनपुरी। प्रदेश सरकार द्वारा आम जनता की शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल करहल थाना क्षेत्र में मजाक बनता नजर आ रहा है। आरोप है कि यहां पुलिस बिना जांच-पड़ताल और बिना वादी से संपर्क किए ही शिकायतों का फर्जी निस्तारण कर रही है।
मामला इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुघर सिंह पत्रकार से जुड़ा है, जिन्होंने लगभग एक माह पूर्व करहल थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति के विरुद्ध रास्ता घेरने, जातिसूचक गाली देने और जान से मारने की धमकी देने की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल, थाना करहल, एसएसपी मैनपुरी तथा अन्य उच्चाधिकारियों से की थी। शिकायत में एससी-एसटी से जुड़ा गंभीर आरोप भी शामिल था, लेकिन पीड़ित का कहना है कि पुलिस ने मामले में न तो वादी को बुलाकर मौके पर जाकर जांच की और न ही कोई प्रभावी कार्रवाई की। न ही फोन करके घटना के संबंध में कोई पूछताछ की।
पीड़ित के अनुसार मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद करीब एक महीने तक किसी भी जांच अधिकारी या पुलिसकर्मी ने उनसे संपर्क नहीं किया। न उन्हें थाने बुलाया गया और न ही घटनास्थल पर जांच के लिए बुलाया गया। इतना ही नहीं, मामले से जुड़ी कॉल डिटेल्स तक निकालने की जरूरत नहीं समझी गई। वादी का आरोप है कि मंगलवार को करहल थाने के सिपाही ललित का फोन आया था, जिसमें उन्होंने बताया कि वह जांच के लिए आ रहे हैं, लेकिन वह मौके पर नहीं पहुंचे। अगले दिन जब वादी ने पोर्टल पर स्थिति देखी तो पता चला कि शिकायत का फर्जी निस्तारण कर दिया गया है। जब सिपाही को कॉल की तो 10 कॉल करने के बाद सिपाही ने फोन नही उठाया। फिर जब जांच अधिकारी उपनिरीक्षक आदेश भारद्वाज को कॉल की गई तो उन्होंने वादी को ही झूठा बता दिया। और बोले कि सिपाही जांच करने गया होगा, आपके पास कॉल की थी उसने, आपकी घटना झूठी निकली है।
पीड़ित सुघर सिंह पत्रकार का कहना है आरोपी दबंग है व उसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। और पूर्व में भी उसके विरुद्ध मुकदमे दर्ज है। राजनीतिक दबाव में चौकी इंचार्ज और करहल थाना प्रभारी महाराज सिंह भाटी ने बिना वादी से बात किए, बिना घटनास्थल पर पहुंचे और बिना तथ्यों की जांच किए ही मामले का निस्तारण कर दिया। इससे न केवल शिकायतकर्ता के साथ अन्याय हुआ है बल्कि मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनसुनवाई पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि कोई अधिकारी फर्जी या कागजी निस्तारण करता पाया गया तो उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद करहल थाने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ित ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह शासन स्तर से लेकर न्यायालय तक जाने को मजबूर होंगे।
इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुघर सिंह पत्रकार ने कहा कि इस संबंध में उनके द्वारा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन, प्रमुख सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश, एडीजी आगरा जोन, डीआईजी आगरा रेंज, एसएसपी मैनपुरी, को पत्र भेज कर शिकायत की गई है और इंस्पेक्टर करहल महाराज सिंह भाटी, चौकी इंचार्ज करहल आदेश भारद्वाज, कांस्टेबल ललित के विरुद्ध जांच करके मुख्यमंत्री के आदेशानुरूप मुकदमा दर्ज कराए जाने का अनुरोध किया है। घटना की जांच को 35 दिन तक दबाए रखने, जांच अधिकारी द्वारा 35 दिन में 1 बार भी कॉल न करने, इंस्पेक्टर करहल व जांच अधिकारी द्वारा एससी एसटी जैसे गंभीर प्रकरण की जांच सिपाही ललित द्वारा करवाने, सिपाही की जांच आख्या पर इंस्पेक्टर व चौकी इंचार्ज हस्ताक्षर करने, व फर्जी जांच की पड़ताल किये बिना संस्तुति करने, घटनास्थल पर वादी को ना बुलाने, शिकायतकर्ता को झूठा बताकर मानहानि करने, सीसीटीवी फुटेज न दिखाने, न ही उपलब्ध कराने, वादी की कॉल न निकालने, थाने में दिए गए प्रार्थना पत्र को गायब करने की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।