महिला दिवस की सार्थकता : वर्तमान समय में - समाचार RIGHT

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सोमवार, 9 मार्च 2026

महिला दिवस की सार्थकता : वर्तमान समय में

महिला दिवस की सार्थकता : वर्तमान समय में

आगरा:-भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) आगरा द्वारा आयोजित शिक्षाविद, रंगकर्मी, समाजसेवी श्रीमती अरुणा रघुवंशी स्मृति विचार गोष्ठी "महिला दिवस की सार्थकता : आज के समय में" नागरी प्रचारिणी सभा, आगरा में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ मधुरिमा शर्मा ने कहा कि साल में एक दिन महिलाओं का महिमा मंडन करना उचित नहीं माना जा सकता और एक महिला जो परिवार और समाज की धुरी है उसे इंसान के रूप में स्वीकार किया जाना अति आवश्यक है।

प्रोफेसर ज्योत्स्ना रघुवंशी ने बताया कि वर्ष 2026 के महिला दिवस का नारा है, "अधिकार, न्याय और कार्यवाही :सभी महिलाओं और बच्चियों के लिए" पर वास्तविकता बहुत भयावह है, तमाम आँकड़ों और संकीर्ण मानसिकता ने पोल खोल दी है।

इस अवसर पर शीरोज हैंग आउट की रूकैया खातून का सम्मान किया गया। रूकैया एसिड अटैक पीड़िता रही हैं और अब मुख्य धारा में इस चेतना को बढ़ा रही हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों में अशोक रावत, नीरज मिश्रा, रमेश पंडित, किरण सिंह, डॉ महेश ढाकरे, ज्योति खंडेलवाल, गायत्री सिंह, राम भारत, अभय पोटाडे, अहमद हसन, भारत सिंह सिकरवार, उमेश शर्मा, रविन्द्र तालेगांवकर, आनंद प्रकाश, टोनी फास्टर, राजश्री, धर्मजीत सिंह, भंते अमर ज्योति और हिना आदि रहे।

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