आगरा में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने का चौंकाने वाला मामला
आगरा के थाना न्यू आगरा क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जमीन विवाद और कुर्की की कार्रवाई से बचने के लिए एक व्यक्ति ने पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर खुद का ही फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया। इस फर्जी रिपोर्ट को न्यायालय में भी प्रस्तुत कर दिया गया, लेकिन जब वादी राजकुमार वर्मा ने आरोपी ताराचंद को शहर में स्कूटी चलाते हुए देख लिया, तो मामला खुल गया।
राजकुमार वर्मा के अनुसार, उनके पिता मदन गोपाल ने वर्ष 1999 में गांधीनगर निवासी विद्या देवी, ताराचंद और अन्य के विरुद्ध एक वाद दर्ज कराया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, वर्ष 2011 में न्यायालय ने ताराचंद के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट और कुर्की का आदेश जारी किया था।
कुर्की से बचने के लिए आरोपी ताराचंद ने अपने बेटे गिरीश चंद, घनश्याम दास उर्फ राजू टंडन और राजकुमार उर्फ टीटू के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची। आरोप है कि इन्होंने तत्कालीन थाना प्रभारी (न्यू आगरा) और थाने के मुंशी के साथ साठगांठ की। पुलिसकर्मियों की मदद से न्यायालय में यह झूठी रिपोर्ट भेज दी गई कि ताराचंद की मृत्यु हो चुकी है और फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र भी पेश कर दिया गया।
जब वादी राजकुमार वर्मा ने आरोपी ताराचंद को शहर में स्कूटी चलाते हुए देख लिया, तो उन्होंने इसकी फोटो खींच ली और साक्ष्य के साथ न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। जांच में सामने आया कि जिस ताराचंद को पुलिस ने मृत घोषित कर दिया था, उसने वर्ष 2016 में अपने नाम से नई स्कूटी भी खरीदी थी।
कोर्ट के आदेश पर थाना न्यू आगरा को जांच के आदेश दिए गए, और 13 जनवरी 2026 को थाना प्रभारी ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर स्वीकार किया कि ताराचंद जीवित है। इस बड़ी धोखाधड़ी और न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने के आरोप में अब तत्कालीन पुलिस अधिकारियों और ताराचंद समेत 6 आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।