“डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी से रहें सावधान: आगरा में 32 लाख की ठगी के बाद अलर्ट जारी
आगरा। मुख्य कोषाधिकारी रीता सचान ने पेंशनरों और आम नागरिकों को “डिजिटल अरेस्ट” नामक साइबर ठगी से सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि हाल ही में साइबर ठगों द्वारा एक महिला शिक्षिका से 32 लाख रुपये ठग लिए गए, जिससे यह मामला बेहद गंभीर हो गया है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से खुद को पुलिस, सीबीआई या भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का अधिकारी बताकर लोगों को डराते-धमकाते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।
क्या है “डिजिटल अरेस्ट” फ्रॉड?
लीड बैंक कनारा के मैनेजर ऋषिकेश बनर्जी के अनुसार, इस फ्रॉड में ठग व्हाट्सएप या स्काइप पर वीडियो कॉल करते हैं और आधार कार्ड के दुरुपयोग, मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध पार्सल जैसे झूठे आरोप लगाकर लोगों को डराते हैं। इसके बाद पीड़ित को एक कमरे में अकेले रहकर कॉल चालू रखने को मजबूर किया जाता है, जिसे “डिजिटल अरेस्ट” कहा जाता है।
ठग गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।
क्या करें और क्या न करें
घबराएं नहीं, यह पूरी तरह धोखाधड़ी है
तुरंत कॉल काट दें
किसी को भी बैंक डिटेल या निजी जानकारी न दें
किसी भी धमकी या लालच में न आएं
परिवार और पुलिस को तुरंत सूचना दें
शिकायत कैसे करें
साइबर क्राइम पोर्टल: www.cybercrime.gov.in
हेल्पलाइन नंबर: 1930
सरकार ने शुरू किए एंटी-स्पूफिंग उपाय
डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्पूफ कॉल्स (जो भारतीय नंबर जैसे दिखते हैं) को ब्लॉक करने के लिए विशेष एंटी-स्पूफिंग उपाय भी शुरू किए हैं।
मुख्य कोषाधिकारी रीता सचान ने सभी पेंशनरों से अपील की है कि वे अनजान कॉल्स से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।