किसानों की समस्याओं को लेकर भाकियू (स्वतंत्र) मुखर: एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा 4 सूत्रीय मांग पत्र
जनपद आगरा कप्तान सिंह चौधरी:- भारतीय किसान यूनियन (स्वतंत्र) ने देश के अन्नदाता की बदहाली और खेती-किसानी के सामने खड़ी चुनौतियों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को संगठन के पदाधिकारियों ने क्षेत्रीय कार्यालय बरहन (आगरा) से एकजुट होकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) एत्मादपुर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन प्रेषित किया। इस ज्ञापन में एमएसपी की जटिलताओं से लेकर आलू किसानों की दुर्दशा तक के गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।
मंडी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण पर उठाए सवाल
यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता विश्वकान्त मिश्र ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार को घेरे में लेते हुए कहा कि वर्तमान में रवि सीजन की फसलें विशेषकर गेहूं और सरसों की खरीद को लेकर किसान असमंजस में हैं। उन्होंने हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लागू की गई नई प्रक्रियाएं—जैसे बायोमेट्रिक सत्यापन, ट्रैक्टर-ट्रॉली की नंबर प्लेट की फोटो अपलोड करना और गेटपास की अनिवार्यता अत्यधिक जटिल और अव्यावहारिक हैं। इसके कारण मंडियों में भारी जाम लग रहा है और किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। यूनियन ने इन नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।
आलू किसानों के लिए राहत पैकेज की पुकार
आगरा और आस-पास के क्षेत्रों में आलू की खेती करने वाले किसानों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए संगठन ने कहा कि आलू के दाम लगातार गिर रहे हैं। लागत न निकलने के कारण किसान कर्ज के दलदल में फंसता जा रहा है, जिससे कई स्थानों पर आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएं सामने आ रही हैं।
यूनियन ने मांग की है कि:
केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर आलू किसानों के लिए विशेष आर्थिक राहत पैकेज घोषित करें। सरकारी स्तर पर आलू की उचित मूल्य पर खरीद सुनिश्चित की जाए।
विदेशी व्यापार समझौतों से कृषि को बचाने की अपील
ज्ञापन में एक बड़ा मुद्दा भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते का भी उठाया गया है। यूनियन का तर्क है कि यदि कृषि, डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र को इस व्यापारिक समझौते में शामिल किया गया, तो विदेशी उत्पादों के आयात से भारतीय किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। संगठन ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि देश के किसानों के हितों की रक्षा के लिए कृषि क्षेत्र को इन समझौतों से बाहर रखा जाए।
संगठन ने यह भी याद दिलाया कि पिछले किसान आंदोलनों के दौरान कई किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे, जो आज भी लंबित हैं। किसानों में सरकार के प्रति विश्वास बहाल करने के लिए इन मुकदमों को बिना शर्त वापस लिया जाना चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। पदाधिकारियों ने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि किसानों की इन जायज मांगों पर शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होगा।
यह मांग पत्र केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों किसानों की आवाज है। सरकार को उनकी आर्थिक सुरक्षा और कृषि व्यवस्था की रक्षा के लिए तुरंत निर्देश जारी करने चाहिए। ज्ञापन देने वालों में राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश शर्मा,राष्ट्रीय प्रवक्ता विश्वकांत मिश्रा,प्रदेश प्रभारी सुनील कुमार समाजसेवी,प्रदेश उपाध्यक्ष इंद्रदत्त गौतम,मंडल अध्यक्ष अल्का शर्मा,जिला अध्यक्ष महिला मोर्चा बिमलेश शर्मा, जिलाध्यक्ष युवा अजय ठाकुर, जिला सचिव राजेश कुमार,तहसील सचिव हरबीर सिंह एवं अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।