पानी के संकट पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, टंकी पर चढ़े महिलाएं-ग्रामीण, बीडीसी सदस्य ने कूदने का किया प्रयास
आगरा। ब्लॉक खेरागढ़ की ग्राम पंचायत बेरी चाहर के गांव गढ़मुक्खा में रविवार को पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। पानी की समस्या से परेशान महिलाएं और ग्रामीण गांव की पानी की टंकी पर चढ़ गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गई जब क्षेत्र पंचायत सदस्य अनीता सिंह ने आक्रोश में टंकी से नीचे कूदने का प्रयास कर दिया। वह टंकी से लटक गईं, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें सुरक्षित ऊपर खींच लिया, जिसके बाद बड़ा हादसा टल गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में कई महीनों से भीषण पेयजल संकट बना हुआ है। बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पीने के पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है, जबकि अधिकारी केवल आश्वासन देकर मामले को टालते रहे हैं।
रविवार को समस्या से त्रस्त महिलाएं और ग्रामीण सीधे पानी की टंकी पर चढ़ गए और जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र पंचायत सदस्य अनीता सिंह भावुक हो गईं और टंकी से नीचे कूदने का प्रयास किया। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। पुलिस और ग्रामीणों की सतर्कता से उन्हें सुरक्षित बचा लिया गया।
घटना की सूचना मिलते ही सुकन्या शर्मा, अंकुर राठी और अभिषेक कुमार सहित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। काफी देर तक चली समझाइश और समस्या के जल्द समाधान के आश्वासन के बाद महिलाएं और ग्रामीण टंकी से नीचे उतरने को तैयार हुए।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने गांव के तालाब और नहर की समस्या भी प्रशासन के सामने रखी। ग्रामीणों का कहना था कि ग्राम पंचायत कागारौल में बने तालाब में लंबे समय से पानी नहीं भरा गया है। उन्होंने मांग की कि तालाब को नहर से जोड़ने के लिए नाली बनवाई जाए ताकि तालाब में पानी पहुंच सके और पालतू व जंगली पशुओं को राहत मिल सके।
नायब तहसीलदार अभिषेक कुमार ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद संबंधित विभागीय अधिकारियों से वार्ता कर जल्द समाधान कराने का भरोसा दिया। हालांकि ग्रामीणों ने साफ कहा कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।