आरटीई में गरीब बच्चों के दाखिले पर डीएम सख्त, एक सप्ताह में शत-प्रतिशत प्रवेश के आदेश
आगरा में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के तहत गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में प्रवेश को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन निजी स्कूलों पर नाराजगी जताई गई, जिन्होंने आवंटन होने के बावजूद बच्चों को प्रवेश नहीं दिया। डीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी कि एक सप्ताह के भीतर सभी पात्र बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा संबंधित स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों के प्रिंसिपल व प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिलाधिकारी ने ऐसे स्कूलों की सूची तलब की, जहां लगातार संपर्क के बावजूद बच्चों को प्रवेश नहीं मिला। बीएसए द्वारा प्रस्तुत सूची में करीब 50 स्कूलों का विवरण शामिल था। इसमें आवंटित बच्चों की संख्या, प्रवेशित बच्चों की स्थिति और प्रवेश न देने के कारणों का ब्यौरा दर्ज था।
समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई नामी स्कूलों में आवंटित बच्चों के मुकाबले एक भी प्रवेश नहीं हुआ। सुमित राहुल गोयल मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सिंपकिंस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, द इंटरनेशनल स्कूल आगरा, होली पब्लिक स्कूल सिकंदरा, गायत्री पब्लिक स्कूल, होली पब्लिक किड्स स्कूल आलमगंज, एसएमडी प्राइमरी स्कूल नाई की मंडी और होली लाइट पब्लिक स्कूल लडामदा जैसे स्कूलों में शून्य प्रवेश पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
डीएम मनीष बंसल ने स्पष्ट कहा कि किसी बच्चे की पात्रता जांचना स्कूल प्रबंधन का अधिकार नहीं है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा लॉटरी से आवंटित प्रत्येक बच्चे का प्रवेश लेना अनिवार्य होगा। यदि किसी प्रकरण में पात्रता को लेकर संदेह हो तो पहले प्रवेश दें और बाद में प्रशासन को सूचित करें। उन्होंने कहा कि अभिभावकों से अंडरटेकिंग ली जा सकती है, लेकिन प्रवेश से इनकार नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ स्कूलों में अभिभावकों को गेट से वापस कर दिया जाता है और कागजी कार्रवाई के नाम पर परेशान किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी अभिभावक को प्रवेश के लिए भटकाया गया तो संबंधित स्कूल और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जाएगी।
बैठक में बीएसए को निर्देश दिए गए कि जिन अभिभावकों की आवंटित स्कूल में जाने की इच्छा नहीं है या स्कूल दूरी पर होने के कारण समस्या है, उनकी अलग सूची तैयार की जाए। साथ ही यदि किसी अपात्र व्यक्ति द्वारा गलत दस्तावेज लगाकर प्रवेश लेने की शिकायत आती है तो उसकी गहन जांच कर दोषी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज कराई जाए।
आरटीई के तहत जनपद में लगभग 8112 बच्चों का आवंटन हुआ है, जबकि अब तक करीब 6100 बच्चों का ही प्रवेश हो सका है। शेष बच्चों के दाखिले को लेकर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को फील्ड स्तर पर तेज और निर्णायक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं और इन बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा सिंह, बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड, एआरटीओ आलोक अग्रवाल, सभी खंड शिक्षा अधिकारी तथा निजी स्कूलों के प्रधानाचार्य एवं प्रबंधन प्रतिनिधि मौजूद रहे।