गांव-गांव तक पहुंचेगा कौशल विकास अभियान, महिलाओं-दिव्यांगों और जीरो पॉवर्टी युवाओं पर विशेष फोकस - समाचार RIGHT

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शनिवार, 9 मई 2026

गांव-गांव तक पहुंचेगा कौशल विकास अभियान, महिलाओं-दिव्यांगों और जीरो पॉवर्टी युवाओं पर विशेष फोकस

गांव-गांव तक पहुंचेगा कौशल विकास अभियान, महिलाओं-दिव्यांगों और जीरो पॉवर्टी युवाओं पर विशेष फोकस

मिशन निदेशक पुलकित खरे ने आगरा में परखी कौशल विकास की रफ्तार, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

आगरा। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा संचालित ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’, SSDF, DDU-GKY और ‘जीरो पॉवर्टी’ अभियान के प्रभावी संचालन को लेकर शुक्रवार को मिशन निदेशक पुलकित खरे ने आगरा मंडल के जनपदों आगरा, मथुरा, मैनपुरी और फिरोजाबाद के जिला समन्वयकों (DCs) और MIS प्रबंधकों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रशिक्षण की गुणवत्ता, निरीक्षण व्यवस्था, नामांकन, प्लेसमेंट और पारदर्शिता जैसे प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मिशन निदेशक ने स्पष्ट कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ का बजट 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। नई शिक्षा नीति के तहत व्यावसायिक शिक्षा को प्रभावी रूप से कक्षा 9 और 11 में लागू किया गया है ताकि प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम व्यवस्थित तरीके से पूरा हो सके।

छात्रों की रुचि के अनुसार होगा ट्रेड चयन

पुलकित खरे ने कहा कि किसी भी ट्रेड—जैसे मेकअप, आईटी या डेयरी फार्मिंग—का चयन ट्रेनिंग पार्टनर्स (TPs) के दबाव में नहीं, बल्कि छात्रों की रुचि और स्थानीय जरूरतों के सर्वे के आधार पर किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि युवाओं की पसंद और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ही प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएं।

‘कौशल दृष्टि’ पोर्टल से होगी मॉनिटरिंग

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मिशन निदेशक ने ‘कौशल दृष्टि’ पोर्टल के प्रभावी उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि 1 अप्रैल से केवल वही निरीक्षण मान्य होंगे, जिन्हें पोर्टल पर फोटो और जियो-टैगिंग के साथ अपलोड किया जाएगा। उन्होंने जिला समन्वयकों को सप्ताह में कम से कम एक औचक निरीक्षण करने और उसकी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने की चेतावनी भी दी गई।

SSDF, DDU-GKY और जीरो पॉवर्टी अभियान पर फोकस

बैठक में SSDF योजना के अंतर्गत 11 मई तक सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर बैच शुरू कराने के निर्देश दिए गए। मिशन निदेशक ने कहा कि अप्रूवल प्रक्रिया में अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

उन्होंने कहा कि समीक्षा के दौरान यह देखा जाएगा कि कितने दिव्यांगजन, महिलाएं और जीरो पॉवर्टी श्रेणी के युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले टॉप-10 जिलों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

DDU-GKY योजना के तहत जल्द धनराशि मिलने की संभावना जताते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फिजिकल वेरिफिकेशन और भुगतान प्रक्रिया को समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए। यदि फोन कॉल के माध्यम से सत्यापन संतोषजनक न हो तो संबंधित अभ्यर्थी के घर जाकर जांच की जाए। उन्होंने कहा कि तीन दिन के भीतर सत्यापन प्रक्रिया पूरी करना सभी DCs, DPMs, BPMs और MIS टीम की संयुक्त जिम्मेदारी होगी।

गांव स्तर तक पहुंच बढ़ाने के निर्देश

मिशन निदेशक ने महिलाओं, दिव्यांगजनों और जीरो पॉवर्टी श्रेणी के युवाओं के अधिक से अधिक इनरोलमेंट पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे युवाओं तक पहुंच बनाना केवल PIA की नहीं, बल्कि जिला प्रशासन और मिशन टीम की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने BDO और ग्राम प्रधानों के माध्यम से गांव-गांव तक संपर्क बढ़ाने के निर्देश दिए।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में जीरो पॉवर्टी श्रेणी का नामांकन मात्र 0.1 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर 1.8 प्रतिशत किया गया है और अब लक्ष्य इसे 3 से 5 प्रतिशत तक पहुंचाने का है। इसके लिए जीरो पॉवर्टी सूची और दिव्यांगजनों के डेटा का उपयोग करते हुए नजदीकी गांवों के युवाओं को प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ा जाएगा।

फर्जी ट्रेनिंग पार्टनर्स पर सख्त कार्रवाई

पुलकित खरे ने बताया कि प्रदेश में करीब 400 फर्जी और निष्क्रिय ट्रेनिंग पार्टनर्स को डी-एम्पैनल कर सिस्टम से बाहर किया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी ट्रेनिंग पार्टनर के दबाव में न आएं और यदि कोई TP केवल आर्थिक लाभ के लिए गलत तरीके से बैच संचालित कर रहा है या उसकी लैब निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन बैचों का प्रशिक्षण पूरा होने वाला है, उनके लिए अभी से प्लेसमेंट प्लान तैयार किया जाए। साथ ही वोकेशनल कक्षाएं स्कूल समय के बाद संचालित की जाएं ताकि विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो।

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