रोजगार सेवकों ने खोला मोर्चा: नियमितीकरण और 10 सूत्रीय मांगों को लेकर विधानसभा घेराव की चेतावनी
आगरा। उत्तर प्रदेश में संविदा पर तैनात करीब 36 हजार ग्राम रोजगार सेवकों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए रोजगार सेवकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने नियमित कर राज्य कर्मचारी का दर्जा देने सहित 10 सूत्रीय मांगें प्रमुखता से उठाई हैं। जिलाध्यक्ष मनमोहन चाहर ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि मांगों का निस्तारण जल्द नहीं हुआ, तो आने वाली 1 जुलाई को लखनऊ में विधानसभा सहित कई प्रमुख सरकारी स्थलों का अनिश्चितकालीन घेराव किया जाएगा।
रोजगार सेवक बोले: 17 वर्षों से संविदा का दंश, मानदेय भी समय पर नहीं
सौपे गए ज्ञापन में रोजगार सेवकों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि वे पिछले 17 वर्षों से वर्ष 2006 से ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के अंतर्गत पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश की 58,194 ग्राम पंचायतों में नियमित सचिवों (ग्राम विकास अधिकारियों) की भारी कमी है। औसतन एक सचिव के पास 4 ग्राम पंचायतों का प्रभार है। रोजगार सेवकों का कहना है कि यदि सरकार 'सहायक सचिव' या 'ग्राम विकास सहायक' का नया पद सृजित कर उन्हें समायोजित कर दे, तो पंचायतों का काम भी आसान हो जाएगा और उनके नियमितीकरण की मांग भी पूरी हो जाएगी।
रोजगार सेवकों ने बताया कि उन्हें वर्तमान में मात्र 10 हजार रुपये प्रति माह मानदेय मिल रहा है, जो कि श्रम विभाग द्वारा तय कुशल कामगारों के मानकों से भी बेहद कम है। कई जिलों में तो 12 से 14 महीने का मानदेय बकाया है, जिससे कर्मचारियों के सामने भुखमरी और आर्थिक तंगी की स्थिति पैदा हो गई है। इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर की तरह उन्हें ईपीएफ, बोनस या किसी भी प्रकार के हेल्थ कार्ड (चिकित्सा लाभ) की सुविधा नहीं मिल रही है, जिससे उनके परिवारों का भविष्य अंधकार में है।
रोजगार सेवकों की 10 प्रमुख मांगें: (1) मुख्यमंत्री की 4 अक्टूबर 2021 की घोषणा के क्रम में मानव संसाधन नीति (HR Policy) लागू कर न्यूनतम 24 हजार रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाए। (2) ग्राम पंचायत स्तर पर मनमाने ढंग से पद से हटाने की व्यवस्था बंद हो, केवल ग्राम सभा के दो-तिहाई बहुमत के आधार पर ही प्रस्ताव पास हो। (3) मानदेय भुगतान के लिए अलग से बजट आवंटित हो ताकि हर महीने समय पर भुगतान हो सके। (4) पिछले 12 से 14 महीनों से रुके हुए मानदेय का अविलंब भुगतान किया जाए। (5) मनरेगा के अलावा ग्राम पंचायत के अन्य कार्यों को भी जॉब चार्ट में जोड़कर उन्हें पूर्ण 'विभागीय कर्मी' घोषित किया जाए। (6) बेहतर मॉनिटरिंग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले एंड्रॉयड मोबाइल फोन और डेटा रिचार्ज की सुविधा मिले। (7) राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की तर्ज पर 20 दिन का आकस्मिक और 12 दिन का चिकित्सा अवकाश दिया जाए।(8) रोजगार सेवकों को गृह ब्लॉक के भीतर ही न्याय पंचायत स्तर पर स्थानांतरण की सुविधा दी जाए। (9) सेवाकाल के दौरान मृत रोजगार सेवकों के परिवारों को मृतक आश्रित कोटे के तहत सेवा का लाभ मिले। (10) 1 जुलाई से लागू होने वाली 'वी०वी०जी० राम जी योजना' में ग्राम रोजगार सेवकों की भूमिका को प्राथमिकता और प्रभावशीलता दी जाए।
यदि हमारी जायज मांगों को समय रहते नहीं माना गया, तो 1 जुलाई 2026 को लखनऊ में विधानसभा, जवाहर भवन, भाजपा कार्यालय, चारबाग रेलवे स्टेशन और राजभवन का ऐतिहासिक घेराव किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।"मनमोहन चाहर, जिलाध्यक्ष
धरने और प्रदर्शन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष मनमोहन चाहर ने किया। इस दौरान प्रमुख रूप से विनय रावत, दलवीर बघेल, हरेन्द्र सिंह, राकेश शर्मा, धर्मेन्द्र सिंह, कल्यान सिंह, देशराज सिंह धाकरे, अशोक कुमार, महेन्द्र सिंह, विष्णु कुमार, योगेन्द्र सिंह, यशपाल सिंह, रविन्द्र सिंह चाहर, सर्वेश सिंह, सचिन कुमार, सोमवीर सोलंकी, प्रताप सिंह, धर्मेन्द्र सिकरवार, सोनवीर चौधरी, नीरज चौहान, अजय यादव, प्रमोद कुमार, रामदत्त, अवधेश यादव, राघवेन्द्र रावत, धारा सिंह, राकेश कुमार कर्दम, महेन्द्र सिंह सहित सैकड़ों रोजगार सेवक उपस्थित रहे।