आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 24 घंटे में तीन हादसे: तीन की मौत, 13 घायल, नींद की झपकी बन रही जानलेवा
आगरा। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर पिछले 24 घंटे के दौरान तीन बड़े सड़क हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था और लंबी दूरी की ड्राइविंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन तीनों दुर्घटनाओं में एक समान कारण सामने आया है—चालकों को आई नींद की झपकी। हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 13 लोग घायल हुए हैं।
कंटेनर में घुसी कार, दो सगे भाइयों समेत तीन की मौत
सबसे दर्दनाक हादसा रविवार देर रात करीब दो बजे फतेहाबाद क्षेत्र में हुआ, जब तेज रफ्तार कार आगे चल रहे कंटेनर में जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा कंटेनर में फंस गया और छत के परखच्चे उड़ गए।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। हाइड्रा मशीन की मदद से कार को कंटेनर से अलग किया गया और घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया।
पुलिस के अनुसार कार बिहार से राजस्थान के चूरू जा रही थी। कार में सवार शंकर कुमार, उनके भाई सुनील कुमार, प्रीति, राजीव कुमार, पूजा, परमिता और आठ वर्षीय अयान्श सहित अन्य लोग मौजूद थे। दुर्घटना में शंकर कुमार, सुनील कुमार और प्रीति की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। प्रारंभिक जांच में चालक को नींद की झपकी आने को हादसे का कारण माना गया है।
एयरफोर्स जवान के परिवार की कार डिवाइडर से टकराई
रविवार दोपहर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 18+500 पर एक टाटा टियागो कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। कार चालक देवेंद्र, जो भारतीय वायु सेना में कार्यरत हैं, अपने परिवार के साथ गुरुग्राम से प्रयागराज जा रहे थे।
कार में उनकी पत्नी रुचि, पुत्र प्रियांशु तथा पुत्रियां दिव्या और लानक्षा सवार थीं। टक्कर के बाद कार पलट गई और फिर एक्सप्रेसवे की मध्य लेन में सीधी होकर रुक गई। हादसे में सभी पांच लोग घायल हुए, हालांकि उनकी चोटें गंभीर नहीं बताई गईं।
यूपीडा और पुलिस टीम ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर घायलों को अस्पताल पहुंचाया। जांच में यहां भी चालक को आई झपकी दुर्घटना की मुख्य वजह बताई गई।
झपकी लगते ही पलटी कार, तीन घायल
तीसरा हादसा शनिवार देर रात एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 31+900 पर हुआ। कार चालक अनिल सिंह अपने साथियों के साथ सौरिख से फतेहाबाद की ओर जा रहे थे। रास्ते में नींद की झपकी आने से कार अनियंत्रित हो गई और मेटल क्रैश बैरियर तोड़ते हुए सड़क किनारे पलट गई।
कार में सवार गौतम सिंह सहित तीन लोग घायल हो गए। राहत की बात यह रही कि सभी को सामान्य चोटें आईं और कोई जनहानि नहीं हुई।
लगातार बढ़ रही झपकी से होने वाली दुर्घटनाएं
एक्सप्रेसवे पर हुए इन तीनों हादसों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान थकान और नींद की झपकी सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार ड्राइविंग करने वाले वाहन चालकों को नियमित अंतराल पर विश्राम करना चाहिए, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
पुलिस और यूपीडा अधिकारियों ने भी वाहन चालकों से अपील की है कि यदि नींद महसूस हो तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर वाहन रोककर आराम करें और उसके बाद ही यात्रा जारी रखें।