अभिमान त्यागे बिना ईश्वर की कृपा असंभव: आचार्य दुर्गेश पाठक - समाचार RIGHT

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शुक्रवार, 12 जून 2026

अभिमान त्यागे बिना ईश्वर की कृपा असंभव: आचार्य दुर्गेश पाठक

अभिमान त्यागे बिना ईश्वर की कृपा असंभव: आचार्य दुर्गेश पाठक

'महारास' की कथा का वास्तविक उद्देश्य जीवन में प्रेम, विनम्रता और समर्पण का भाव जगाना है: कथा व्यास

जनपद आगरा:- आंवलखेड़ा। मनुष्य जब तक अपने भीतर के अहंकार और अभिमान का पूरी तरह त्याग नहीं कर देता, तब तक उसे ईश्वर की सच्ची कृपा और भक्ति प्राप्त नहीं हो सकती। ‘महारास’ की दिव्य कथा का वास्तविक उद्देश्य ही मानव जीवन में निश्छल प्रेम, परम विनम्रता और पूर्ण समर्पण का भाव जाग्रत करना है। यह पावन विचार क्षेत्र के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम (छठे) दिवस पर प्रख्यात कथा व्यास आचार्य दुर्गेश पाठक ने व्यक्त किए।
कथा के छठे दिन आचार्य जी ने भगवान कृष्ण और गोपियों के बीच के अलौकिक प्रेम और 'गोपी विरह प्रसंग' का अत्यंत भावपूर्ण और मार्मिक वर्णन किया। व्यास पीठ से बोलते हुए उन्होंने कहा कि महारास की कथा सुनना और उसे समझना तभी सार्थक होता है, जब मनुष्य अपने अहम को छोड़कर झुकना सीखता है। अहंकार को त्याग कर ही भक्ति के परम मार्ग पर चला जा सकता है। गोपी विरह के प्रसंग को सुनकर पांडल में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं की आंखें सजल हो उठीं और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

कथा में उमड़ा जनसैलाब

भागवत महापुराण की इस दिव्य ज्ञान गंगा में डुबकी लगाने के लिए क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोग और भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। छठे दिन मुख्य रूप से मुख्य यजमान परीक्षित विनोद कुमार चौहान एवं सुनीता देवी, रामवीर सिंह चौहान, सत्येंद्र सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख जगवीर सिंह तोमर, डॉ. महेश चौधरी, नारायण माहेश्वरी, पंडित प्रमोद कुमार, नेत्रपाल शर्मा, संजीव माहेश्वरी, राकेश फौजी, सत्यवीर सिंह, कृष्णा, काव्या सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति और क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आरती और महाप्रसाद वितरण के साथ छठे दिन की कथा का विश्राम हुआ।

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