प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान, कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी में कार्यशाला और विकास प्रदर्शनी का आयोजन
आगरा। केंद्र सरकार के विश्वास, विकास एवं जनकल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र, बिचपुरी में प्राकृतिक खेती विषयक कार्यशाला, विकास प्रदर्शनी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभों से अवगत कराया गया तथा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी तथा फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर ने दीप प्रज्ज्वलित एवं फीता काटकर किया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, किसान समृद्धि आयोग के सदस्य ऋषि कुमार, उपनिदेशक कृषि मुकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार, जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक आर.एस. चौहान सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में कृषि, उद्यान, पशुपालन, सिंचाई, वर्षा जल संचयन, भूमि संरक्षण तथा प्राकृतिक खेती से संबंधित विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए। जनप्रतिनिधियों और किसानों ने इन स्टॉलों का अवलोकन कर योजनाओं और तकनीकी सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की।
अपने संबोधन में प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि भूमि, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है तथा इसका दुष्प्रभाव खाद्यान्न और मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने और इसे जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हित में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, पीएम-कुसुम योजना, कृषि यंत्रीकरण, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन, आत्मा योजना, परम्परागत कृषि विकास योजना, फसल ऋण मोचन और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।
फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता और खाद्यान्न की पौष्टिकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने किसानों से जैविक खाद, गोबर खाद और प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे स्वस्थ समाज और समृद्ध कृषि व्यवस्था का निर्माण संभव होगा।
कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों अक्षय कुमार, कल्पना मिश्रा, घनश्याम, नवल सिंह और मान सिंह सहित अन्य कृषकों को अंगवस्त्र एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं श्यामवीर, समस्ती, थान सिंह, शेर सिंह और धर्मेंद्र को ट्रैक्टर की चाबियां तथा 10 किसानों को रागी मिनी किट वितरित किए गए।
कार्यशाला में प्रगतिशील किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और अन्य किसानों को इसके व्यवहारिक लाभों की जानकारी दी। कृषि, डेयरी एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने भी किसानों को विभिन्न योजनाओं, अनुदानों और तकनीकी सुविधाओं के बारे में विस्तार से अवगत कराया।
कार्यक्रम में किसानों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं नागरिकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण और कृषि विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।