आगरा में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना और डीबीटी वितरण का शुभारंभ, 12 लाख शिक्षकों को मिलेगा कैशलेस इलाज
आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों, शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात देते हुए 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' और डीबीटी वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आगरा में इसका मुख्य आयोजन खंदारी स्थित आरबीएस कॉलेज के राव कृष्णपाल सिंह ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया, जहां महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनिया, जिलाधिकारी मनीष बंसल और मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान वाराणसी स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा योजना के शुभारंभ का सीधा प्रसारण देखा गया। इसके बाद अतिथियों ने शिक्षकों एवं लाभार्थियों को कैशलेस चिकित्सा योजना के प्रमाणपत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।
नई योजना के तहत प्रदेश के करीब 12 लाख शिक्षकों, शिक्षा विभाग के कर्मचारियों तथा उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। इसमें बेसिक, माध्यमिक, संस्कृत और व्यावसायिक विद्यालयों के शिक्षक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के वार्डन, अनुदेशक तथा रसोइयों को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही लगभग 10 लाख शिक्षकों और संविदा कर्मियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एसबीआई के साथ एमओयू भी किया गया।
वहीं प्रदेश के 1.10 करोड़ परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से ₹1200 प्रति छात्र की धनराशि भेजी गई। यह राशि यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी की खरीद के लिए उपलब्ध कराई गई है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षकों और शिक्षा परिवार से जुड़े सभी कर्मचारियों की स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं तथा उन्हें विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्य और राष्ट्रभक्ति का भाव विकसित करना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे आचार्य चाणक्य की तरह चरित्रवान और सक्षम पीढ़ी तैयार करें, जो भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में अपनी भूमिका निभा सके।