आगरा में नकली दवाओं के अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़, ₹3.63 करोड़ की संदिग्ध दवाएं जब्त; 58 थोक लाइसेंस निरस्त या निलंबित
आगरा। उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर आगरा में नकली दवाओं, री-लेबलिंग और सरकारी आपूर्ति की दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि फर्जी बिलों और नकली लेबल के माध्यम से सरकारी अस्पतालों तथा अन्य संस्थानों के लिए भेजी जाने वाली दवाओं को खुले बाजार में बेचा जा रहा था।
एफएसडीए के अनुसार अब तक की कार्रवाई में 58 थोक दवा लाइसेंस निरस्त अथवा निलंबित किए जा चुके हैं। साथ ही 9 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं और करीब ₹3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की संदिग्ध एवं अवैध दवाएं जब्त की गई हैं। विभाग का दावा है कि यह नेटवर्क कई जिलों और राज्यों तक फैला हुआ है तथा इसकी गहन जांच जारी है।
13 दवा फर्मों पर एक साथ छापेमारी
10 जुलाई को एफएसडीए आयुक्त के नेतृत्व में 15 औषधि निरीक्षकों की विशेष टीमों ने कम्बूटोला, मुबारक महल, शू मार्केट और नवबिया मार्केट स्थित 13 संदिग्ध दवा फर्मों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान मोहन ट्रेडर्स और मनी मेडिकल को सील कर दिया गया, जबकि नीलकंठ फार्मा और मनु फार्मा की दवा बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई। टीम ने मौके से 35 संदिग्ध दवाओं के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं।
फर्जी बिलों के सहारे बाजार में खपाई जा रही थीं दवाएं
जांच में सामने आया कि फर्जी खरीद-बिक्री के दस्तावेज तैयार कर Chymoral Forte, Shelcal, Aciloc समेत कई प्रसिद्ध ब्रांडों की दवाओं और ईएसआई आपूर्ति की दवाओं को खुले बाजार में बेचा जा रहा था। अधिकारियों के मुताबिक सरकारी अस्पतालों के लिए भेजी जाने वाली दवाओं के मूल लेबल हटाकर उन पर नए एमआरपी वाले स्टिकर लगाए जाते थे और फिर उन्हें सामान्य मेडिकल स्टोरों के माध्यम से ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था।
इंसुलिन बिना कोल्ड-चेन के मिली, सीसीटीवी में कैद हुए आरोपी
एफएसडीए की टीम को युग फार्मा में बिना कोल्ड-चेन के रखी गई इंसुलिन भी मिली, जिससे उसकी गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। वहीं शारदा फार्मा के सीसीटीवी फुटेज में आरोपी नबील खान और सोनू बघेल दवाओं के कार्टन लेकर जाते हुए दिखाई दिए। अधिकारियों के अनुसार छापेमारी की सूचना मिलते ही कुछ लोगों ने सबूत मिटाने का भी प्रयास किया।
एसटीएफ ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
एफएसडीए की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसटीएफ गाजियाबाद ने कार्रवाई करते हुए नबील खान और सोनू बघेल को गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर सरकारी और अस्पतालों की दवाओं की री-लेबलिंग कर उन्हें खुले बाजार में बेचने का आरोप है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य कारोबारियों, सप्लायरों और वितरकों की तलाश में जुटी हुई हैं।
कई कारोबारियों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
नई दर्ज तीन एफआईआर में विभोर मेडिकल एजेंसी के संजीव कुमार गुप्ता, वरदान मेडिकल एजेंसी के अंकुर अग्रवाल, हर्षित ट्रेडर्स की प्रियंका बंसल, गुप्ता मेडिकल एजेंसी गोरखपुर के अरुण कुमार गुप्ता, पाल ब्रदर्स (कोलकाता), युग फार्मा के सचिन गुप्ता, शारदा फार्मा के शिवम गुप्ता और नितिन गुप्ता, आरएमडी फार्मा के राजेश गुप्ता, महादेव फार्मा के मोहित गुप्ता और हितेन्द्र अग्रवाल, वी.ए. मेडिकोज के शोभित अग्रवाल और प्रमोद अग्रवाल, रुद्रा एंटरप्राइजेज के मोहित बंसल तथा श्री भगवती मेडिकल एजेंसी के प्रवीण अग्रवाल को नामजद किया गया है। एफएसडीए के अनुसार अंकुर अग्रवाल और संजीव कुमार गुप्ता का नाम दो अलग-अलग एफआईआर में भी शामिल है।
करोड़ों रुपये की दवाएं बरामद
छापेमारी के दौरान विभिन्न गोदामों और एजेंसियों से भारी मात्रा में दवाएं जब्त की गईं। ज्योति ड्रग हाउस से लगभग ₹2.50 करोड़, श्री मेडिकल एजेंसीज से करीब ₹50 लाख, ब्राइट फार्मा से लगभग ₹5.20 लाख तथा अन्य गोदामों से करीब ₹67 लाख मूल्य की दवाएं बरामद की गईं। जब्त दवाओं में इंसुलिन, वैक्सीन, डिफेंस और ईएसआई सप्लाई की दवाएं, फिजिशियन सैंपल तथा संदिग्ध नकली दवाएं शामिल हैं।
आयुक्त ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
एफएसडीए आयुक्त रोशन जैकब ने कहा कि नकली दवाओं के इस अंतरजनपदीय नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा कारोबार की आड़ में फर्जी बिलिंग, री-लेबलिंग, सरकारी दवाओं की अवैध बिक्री और नकली दवाओं के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे सभी लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।