आगरा के बटेश्वर से बाबा नीब करौरी संग्रहालय तक 58 पर्यटन परियोजनाओं की समीक्षा, मंत्री जयवीर सिंह बोले- अब कागजों नहीं, जमीन पर होगी योजनाओं की जांच
आगरा। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को सर्किट हाउस में वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग की परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास की योजनाओं को केवल कागजी प्रस्तावों के आधार पर मंजूरी नहीं मिलेगी, बल्कि प्रत्येक परियोजना का पहले स्थलीय निरीक्षण कर उसकी उपयोगिता और जनहित का आकलन किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि जनता के धन का उपयोग केवल उन्हीं परियोजनाओं पर किया जाएगा, जिनका लाभ सीधे लोगों तक पहुंचे। योजनाओं के चयन से लेकर निर्माण कार्य पूरा होने तक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में पहले चरण के तहत आगरा और अलीगढ़ मंडल की परियोजनाओं की समीक्षा की गई। आगरा मंडल की 58 पर्यटन परियोजनाओं पर करीब 273 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से चर्चा हुई। इसके अलावा मथुरा जनपद की धर्मार्थ विभाग से जुड़ी तीन परियोजनाओं पर भी विचार किया गया, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 245 करोड़ रुपये है।
समीक्षा बैठक में आगरा के बटेश्वर धाम स्थित प्राचीन मंदिरों के संरक्षण, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी स्मारक पर पर्यटक सुविधाओं के विकास, कोठी मीना बाजार के सौंदर्यीकरण, पार्किंग और अन्य सुविधाओं के विस्तार के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इसके साथ ही फिरोजाबाद में आर्य संस्कृति संकुल के विकास, बाबा नीब करौरी संग्रहालय के दूसरे चरण, जिला सीमाओं पर पर्यटन सूचना केंद्र और महुआ वाली कालिका माता मंदिर में पर्यटक सुविधाओं के विकास की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। वहीं मैनपुरी में शीतला माता मंदिर, राम जानकी मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पर्यटक सुविधाएं विकसित करने के प्रस्ताव भी बैठक में रखे गए।
धर्मार्थ कार्य विभाग की लगभग 245 करोड़ रुपये लागत वाली तीन प्रमुख परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। इनमें 15 धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं विकास, श्री बांके बिहारी जी महाराज कॉरिडोर तथा विभिन्न धार्मिक स्थलों पर जनसुविधाओं के विस्तार से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि श्री बांके बिहारी कॉरिडोर का मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
बैठक के अंत में मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित अभिलेख, तकनीकी विवरण और भूमि संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही अंतिम कार्ययोजना प्रस्तुत की जाए। उन्होंने संयुक्त स्थलीय निरीक्षण कराने के भी निर्देश दिए, ताकि परियोजनाओं का चयन केवल फाइलों के आधार पर नहीं बल्कि वास्तविक आवश्यकता और जनहित को ध्यान में रखकर किया जा सके।
बैठक में मंडलायुक्त नागेंद्र प्रताप, जिलाधिकारी मनीष बंसल, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह सहित पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंत्री ने बताया कि प्रदेश के शेष 16 मंडलों की परियोजनाओं की समीक्षा भी चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।