काल बनकर आई बिजली की एक चिंगारी: शमसाबाद में सोए रह गए माता-पिता, चार बच्चे हुए बेसहारा - समाचार RIGHT

BREAKING NEWS

रविवार, 5 जुलाई 2026

काल बनकर आई बिजली की एक चिंगारी: शमसाबाद में सोए रह गए माता-पिता, चार बच्चे हुए बेसहारा

काल बनकर आई बिजली की एक चिंगारी: शमसाबाद में सोए रह गए माता-पिता, चार बच्चे हुए बेसहारा

शमसाबाद (आगरा) कुतकपुर गांव में शनिवार की रात एक ऐसा सन्नाटा पसर गया, जिसे सुनकर हर किसी का कलेजा कांप उठे। घर में खुशहाली थी, परिवार साथ सो रहा था, लेकिन सुबह का सूरज चार मासूम बच्चों के लिए अंधेरा लेकर आया। बिजली के एक मामूली से तार ने न सिर्फ एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि चार बच्चों के सिर से माता-पिता का साया भी छीन लिया।

सोते रह गए माता-पिता, सुबह का मंजर देख थम गईं सांसें

घटना शनिवार रात करीब 11 बजे की है। जगदीश, जो गांव में परचून की दुकान चलाने के साथ खेती-किसानी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे, दिनभर की थकान के बाद अपनी पत्नी शशि के साथ सोने गए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी रात है। रविवार की सुबह जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो स्वजनों की बेचैनी बढ़ गई। जब दरवाजा तोड़ा गया, तो भीतर का नजारा देख सबकी रूह कांप गई—जगदीश और शशि अचेत पड़े थे और उनकी सांसें थम चुकी थीं।


जांच में सामने आया कि यह हादसा बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ। आशंका है कि दीवार पर लगे बिजली बोर्ड से एक तार टूटकर कमरे में रखे लोहे के संदूक पर जा गिरा, जिससे पूरे कमरे में करंट दौड़ गया। दंपती अनजाने में इसकी चपेट में आ गए और बिजली के जोरदार झटके ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया।

उसी कमरे में सो रहे थे बच्चे, अब भविष्य पर गहरा प्रश्नचिह्न

इस हादसे का सबसे दुखद पहलू यह है कि जिस कमरे में यह त्रासदी हुई, उसी में जगदीश और शशि के चार बच्चे—मोना, सोना, सूर्य और हेमंत—भी बेसुध सो रहे थे। कुदरत का करिश्मा ही था कि वे बिजली के उस घातक जाल से बाल-बाल बच गए, लेकिन सुबह उठते ही उन्होंने अपने माता-पिता को हमेशा के लिए खो दिया। 14 साल पहले शुरू हुआ यह हंसता-खेलता परिवार आज पूरी तरह बिखर चुका है।

सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर सुरेंद्र राव अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। और पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला करंट लगने का ही है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हादसे की हर कड़ी स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, गांव कुतकपुर में मातम छाया हुआ है। हर किसी की आंखों में आंसू हैं और उन चार बच्चों के भविष्य को लेकर हर ग्रामीण चिंतित है, जिन्होंने चंद घंटों में अपना सब कुछ खो दिया।

video

Pages