ताजमहल में दिखी ‘अतिथि देवो भवः’ की मिसाल: महिला सिपाही ने अर्जेंटीना की पर्यटक को पहनाई साड़ी, जीता दिल
आगरा। दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल मंगलवार को भारतीय संस्कृति, संवेदनशीलता और मेहमाननवाजी की अनूठी मिसाल का साक्षी बना। ताजमहल घूमने आई अर्जेंटीना की एक महिला पर्यटक की साड़ी बार-बार खुलने लगी तो सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात महिला आरक्षी ने आगे बढ़कर न केवल उनकी साड़ी ठीक की, बल्कि उन्हें साड़ी पहनने का सही तरीका भी सिखाया। इस आत्मीय व्यवहार ने विदेशी पर्यटक का दिल जीत लिया।
मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे ताजमहल के पश्चिमी गेट से अर्जेंटीना के मैसी शहर से आए पर्यटकों का एक दल स्मारक देखने पहुंचा था। भारतीय संस्कृति से प्रभावित एक महिला पर्यटक ने आसमानी रंग की साड़ी पहन रखी थी, लेकिन परिसर में घूमते समय उनकी साड़ी बार-बार खुलने लगी, जिससे वह असहज हो गईं।
इसी दौरान ताज सुरक्षा में तैनात क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की महिला आरक्षी गुड्डी देवी की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तुरंत आगे बढ़कर बड़े धैर्य और आत्मीयता के साथ पर्यटक की साड़ी ठीक की। इतना ही नहीं, उन्होंने साड़ी की प्लेट्स बनाना, पल्लू संभालना और साड़ी को इस तरह पहनने का तरीका भी समझाया कि चलते समय कोई परेशानी न हो।
महिला आरक्षी की मदद से प्रभावित विदेशी पर्यटक ने भारतीय महिलाओं के साड़ी पहनने की परंपरा के बारे में भी कई सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि भारतीय महिलाएं साड़ी कब पहनती हैं, पूरे दिन उसे कैसे संभालती हैं और पल्लू तथा प्लेट्स बनाने का सही तरीका क्या होता है।
अर्जेंटीना की महिला पर्यटक ने कहा कि उन्हें भारतीय साड़ी बेहद पसंद है और यह भारत की सबसे सुंदर एवं आकर्षक पारंपरिक पोशाकों में से एक है। उन्होंने मुस्कुराते हुए "थैंक यू यूपी पुलिस" कहा, महिला आरक्षी गुड्डी देवी से हाथ मिलाया और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
महिला आरक्षी गुड्डी देवी ने बताया कि वह अवकाश के समय अक्सर साड़ी पहनती हैं और कभी-कभी ड्यूटी के दौरान भी वर्दी वाली साड़ी पहनती हैं। उन्होंने कहा, "जब मैंने विदेशी महिला की साड़ी ठीक की तो वह बहुत खुश हुईं। उन्होंने मुझे और पूरी पुलिस टीम का दिल से धन्यवाद दिया।"
साड़ी ठीक होने के बाद अर्जेंटीना के पर्यटकों ने ताजमहल का आनंदपूर्वक भ्रमण किया और पुलिस टीम के साथ समूह फोटो भी खिंचवाई। इस दौरान ताज सुरक्षा थाना के दरोगा शिवराज सिंह, हेड कॉन्स्टेबल किरण पाल सिंह, सिपाही दुर्गेश कुमार और महिला आरक्षी गुड्डी देवी मौजूद रहे।
ताजमहल में घटी यह छोटी-सी घटना विदेशी मेहमानों के लिए भारतीय संस्कृति, मानवीय संवेदनशीलता और "अतिथि देवो भवः" की भावना का यादगार अनुभव बन गई।