17 दिन में चीनी 46 से 60 रुपये किलो पहुंची, त्योहार से पहले महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट - समाचार RIGHT

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बुधवार, 19 अगस्त 2026

17 दिन में चीनी 46 से 60 रुपये किलो पहुंची, त्योहार से पहले महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट

17 दिन में चीनी 46 से 60 रुपये किलो पहुंची, त्योहार से पहले महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट

आगरा। त्योहारों से पहले बढ़ती महंगाई ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रसोई में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली खाद्य वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सबसे ज्यादा तेजी चीनी के भाव में देखने को मिली है। महज 17 दिनों में चीनी के दाम 46 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी से जहां आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित हुआ है, वहीं कारोबारी भी लगातार बढ़ते भाव से हैरान हैं। व्यापारियों ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकारी हस्तक्षेप की मांग की है।

हर दूसरे दिन बढ़ रहे चीनी के दाम

आगरा के कारोबारी मोहित के अनुसार, पिछले करीब दो सप्ताह से चीनी के भाव में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि एक अगस्त को पहली बार थोक भाव में करीब चार से पांच रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई थी। उस समय थोक बाजार में चीनी करीब 49 रुपये और फुटकर में 50 रुपये प्रति किलो बिक रही थी।

इसके बाद लगातार तेजी का सिलसिला जारी रहा और 17 अगस्त को चीनी का फुटकर भाव करीब 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। कारोबारियों का कहना है कि इतनी कम अवधि में कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी बाजार के लिए असामान्य है।

सरसों का तेल भी 20 रुपये तक महंगा

चीनी के अलावा खाद्य तेल और चावल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। सरसों का तेल पहले करीब 170 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, जो बढ़कर अब 190 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

तेल की कीमत बढ़ने से त्योहारों पर पकवान बनाने की तैयारी कर रहे परिवारों का खर्च और बढ़ गया है।

चावल और दालों के दाम भी बढ़े

चावल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। करीब 50 रुपये प्रति किलो बिकने वाला चावल अब बाजार में 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

वहीं दालों के दाम में भी करीब 5 से 10 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी बताई जा रही है।

त्योहार से पहले महंगाई की मार

चीनी, तेल, चावल और दाल जैसी रोजमर्रा की जरूरत वाली वस्तुओं के दाम बढ़ने से त्योहार से पहले ही लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है। कारोबारी भी अचानक बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित हैं और सरकार से बाजार में हस्तक्षेप कर कीमतों पर निगरानी रखने की मांग कर रहे हैं।

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