‘पुष्पराज’ बना दरोगा, थानाध्यक्ष को नहीं करता ‘जय हिंद’, थाने में छिड़ी अनोखी तकरार - समाचार RIGHT

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गुरुवार, 20 अगस्त 2026

‘पुष्पराज’ बना दरोगा, थानाध्यक्ष को नहीं करता ‘जय हिंद’, थाने में छिड़ी अनोखी तकरार

‘पुष्पराज’ बना दरोगा, थानाध्यक्ष को नहीं करता ‘जय हिंद’, थाने में छिड़ी अनोखी तकरार

आगरा। ‘पुष्पा’ फिल्म में अभिनेता अल्लू अर्जुन का किरदार पुष्पराज और उसका चर्चित डायलॉग ‘झुकेगा नहीं साला’ खूब सुर्खियों में रहा था। आगरा कमिश्नरेट के एक थाने में इन दिनों कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां मामला किसी फिल्मी किरदार का नहीं, बल्कि एक दरोगा और उसके थानाध्यक्ष के बीच ‘जय हिंद’ को लेकर चल रही कथित तनातनी का है।

थाने का स्टाफ भी इस पूरे मामले को लेकर चुटकी लेने से पीछे नहीं है। कुछ पुलिसकर्मी मजाक में दरोगा को ‘पुष्पराज’ तक कहने लगे हैं। वजह है कि थानाध्यक्ष को दरोगा का ‘जय हिंद’ न करना। बताया जा रहा है कि थानाध्यक्ष के लिए यह अब महज अभिवादन का मामला नहीं, बल्कि मान-सम्मान और पुलिस प्रोटोकॉल से जुड़ गया है। वहीं दरोगा भी अपने रुख पर कायम बताए जा रहे हैं।

ड्यूटी को लेकर हुई कहासुनी के बाद बिगड़ी बात

बताया जा रहा है कि संबंधित थानाध्यक्ष को पहली बार थाने का चार्ज मिला है। स्वभाव से सीधे माने जाने वाले थानाध्यक्ष की ड्यूटी को लेकर एक दरोगा से कहासुनी हो गई थी। दरोगा की नाराजगी इस बात को लेकर बताई जा रही है कि उसकी ही ज्यादा ड्यूटी लगाई जाती है।

कहासुनी के बाद दोनों के बीच तल्खी इतनी बढ़ गई कि दरोगा ने थानाध्यक्ष को ‘जय हिंद’ करना ही बंद कर दिया। अब स्थिति यह है कि दरोगा जैसे ही थाने पहुंचता है, स्टाफ की नजर इस बात पर रहती है कि वह थानाध्यक्ष को ‘जय हिंद’ करता है या नहीं। लेकिन बताया जा रहा है कि दरोगा बिना अभिवादन किए ही अपनी ड्यूटी में लग जाता है।

थानाध्यक्ष भी अड़े, बोले—‘जय हिंद तो करनी पड़ेगी’

दरोगा के इस रवैये से थानाध्यक्ष खासे नाराज बताए जा रहे हैं। उन्होंने दरोगा से जय हिंद करने के लिए कहा, लेकिन दरोगा ने कथित तौर पर अपना रुख नहीं बदला। इसके बाद मामला थाने की चारदीवारी से निकलकर सिफारिशों तक पहुंच गया।

चर्चा है कि दरोगा की ओर से एक मंत्री के पीएसओ से थानाध्यक्ष को फोन कराया गया। फोन पर दरोगा की पैरवी करते हुए उसे अच्छा और खास बताया गया। इसके बाद थानाध्यक्ष ने थाने में ही कहा कि उनके पास नेताओं की ओर से फोन आ रहे हैं, लेकिन ‘जय हिंद तो करनी पड़ेगी।’

एसीपी के फोन के बाद भी नहीं बदला थानाध्यक्ष का रुख

मामला यहीं नहीं रुका। इसके बाद एक एसीपी से भी थानाध्यक्ष को फोन कराने की चर्चा है। एसीपी ने भी दरोगा की तारीफ करते हुए उसे अच्छा पुलिसकर्मी बताया। एसीपी का फोन आने के बाद भी थानाध्यक्ष का रुख नहीं बदला। उन्होंने कथित तौर पर साफ कर दिया कि फोन भले ही किसी का आए, लेकिन जय हिंद तो करनी पड़ेगी।

अब पूरे थाने की निगाह ‘जय हिंद’ पर

इस अनोखी तकरार के बाद अब थाने का स्टाफ भी पूरे घटनाक्रम को लेकर उत्सुक है। रोजाना दरोगा के थाने पहुंचने पर निगाहें इस बात पर टिक जाती हैं कि आज वह थानाध्यक्ष को ‘जय हिंद’ करेगा या नहीं।

कुछ पुलिसकर्मी तो मजाक में यह भी कह रहे हैं कि दरोगा इन दिनों ‘पुष्पराज’ बन गए हैं और उनका रुख फिल्मी अंदाज में है—‘झुकेगा नहीं।’

फिलहाल मामला विभागीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ थानाध्यक्ष इसे सम्मान और अनुशासन से जोड़कर देख रहे हैं तो दूसरी ओर दरोगा अपने रुख पर कायम बताए जा रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस ‘जय हिंद’ की जंग में आखिर कौन झुकता है—थानाध्यक्ष या फिर दरोगा का ‘पुष्पराज’ वाला तेवर कायम रहता है।

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